
चंडीगढ़। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी नेतृत्व ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग को पद छोड़ने के लिए कहा है। यह फैसला पंजाब के नए AICC प्रभारी महासचिव सचिन पायलट की ओर से पिछले करीब तीन हफ्तों में राज्य के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और संगठन पदाधिकारियों से लिए गए फीडबैक के बाद लिया गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से जारी गुटबाजी और नेतृत्व को लेकर असंतोष इस बदलाव की प्रमुख वजहों में शामिल है।
सचिन पायलट को 5 सितंबर को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी महासचिव बनाया गया था। उन्होंने इस पद पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जगह ली थी। जिम्मेदारी संभालने के बाद पायलट ने पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के नेताओं से लगातार बातचीत की। उन्होंने सांसदों, विधायकों, पूर्व मंत्रियों और संगठन के अन्य नेताओं से मुलाकात कर प्रदेश संगठन की स्थिति और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर फीडबैक लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट कांग्रेस नेतृत्व को सौंपी।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि पंजाब से कांग्रेस के अधिकांश लोकसभा सांसदों और कई वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश नेतृत्व में बदलाव की जरूरत जताई थी। कुछ नेताओं ने वडिंग की कार्यशैली को लेकर भी अपनी आपत्तियां पार्टी हाईकमान के सामने रखी थीं। इसी फीडबैक के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने मौजूदा व्यवस्था में बदलाव करने का फैसला किया। हालांकि पार्टी की ओर से नए प्रदेश अध्यक्ष के नाम का औपचारिक ऐलान अभी बाकी है।
पंजाब कांग्रेस में पिछले कुछ महीनों से अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आते रहे हैं। एक तरफ राजा वडिंग का खेमा है, जबकि दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी समेत कई वरिष्ठ नेताओं के साथ उनके मतभेदों की चर्चा होती रही है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश आगामी विधानसभा चुनाव से पहले इन गुटों के बीच तालमेल स्थापित करने और संगठन को एकजुट करने की है। सचिन पायलट ने कार्यभार संभालने के बाद वडिंग और चन्नी दोनों से बातचीत की और सभी नेताओं को साथ लेकर चलने पर जोर दिया।
कांग्रेस ने जुलाई में एक समय वडिंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बनाए रखने का फैसला किया था। साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। उस समय पार्टी ने संगठन के भीतर संतुलन बनाने की कोशिश की थी, लेकिन इसके बाद भी अंदरूनी मतभेद पूरी तरह खत्म नहीं हुए। अब पार्टी नेतृत्व विधानसभा चुनाव से पहले नए सिरे से संगठनात्मक समीकरण तैयार करने में जुट गया है।
राजा वडिंग ने गुरुवार को इस मामले पर कहा था कि अंतिम फैसला पार्टी हाईकमान को करना है और जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसे स्वीकार किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में खुद को “पूर्व पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष” लिख दिया, जिससे नेतृत्व परिवर्तन की अटकलें और तेज हो गईं। हालांकि नए अध्यक्ष के नाम पर कांग्रेस की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है। इनमें पूर्व सांसद और पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। इसके अलावा पूर्व ओलंपियन और जालंधर कैंट विधायक परगट सिंह, पूर्व विधायक राणा केपी सिंह, राजा सांसी के विधायक सुखबिंदर सिंह सरकारिया और गुरदासपुर सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा के नाम भी चर्चा में बताए जा रहे हैं। पार्टी नेतृत्व ऐसे चेहरे की तलाश कर रहा है जो विभिन्न गुटों को साथ ला सके और चुनाव से पहले संगठनात्मक संतुलन कायम कर सके।
कांग्रेस नेतृत्व के सामने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। पंजाब की राजनीति में मालवा, माझा और दोआबा क्षेत्रों का अलग-अलग महत्व है। इसके अलावा जाट सिख, दलित और हिंदू समुदायों के बीच प्रतिनिधित्व का संतुलन भी प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर नए अध्यक्ष के नाम पर फैसला करना चाहती है।
पंजाब में 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज करते हुए 117 में से 92 सीटें जीती थीं। कांग्रेस को उस चुनाव में 18 सीटों पर जीत मिली थी। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और आंतरिक मतभेद कम करने पर जोर दे रही है।
सचिन पायलट की नियुक्ति को भी इसी संगठनात्मक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने जिम्मेदारी संभालने के बाद सार्वजनिक रूप से कहा था कि पार्टी पंजाब में एकजुट होकर चुनाव की तैयारी कर रही है। इसके बावजूद अलग-अलग नेताओं से मिले फीडबैक के आधार पर प्रदेश अध्यक्ष बदलने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
अब कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय करने की है। पार्टी नेतृत्व ऐसा चेहरा चाहता है जो वरिष्ठ नेताओं, सांसदों और विधायकों के बीच स्वीकार्य हो और अलग-अलग गुटों के साथ समन्वय बनाकर काम कर सके। साथ ही नए अध्यक्ष को चुनावी तैयारी, बूथ स्तर के संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की जिम्मेदारी भी संभालनी होगी।
राजा वडिंग के संभावित हटने के बाद पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व का नया दौर शुरू होगा। पार्टी की कोशिश है कि विधानसभा चुनाव से पहले संगठन के भीतर जारी खींचतान को कम किया जाए और सभी प्रमुख नेताओं को एक मंच पर लाया जाए। अब नजर कांग्रेस हाईकमान की औपचारिक घोषणा पर है, जिसमें नए पंजाब प्रदेश अध्यक्ष के नाम का ऐलान किया जा सकता है।





