पंजाब
Ludhiana MC की मशीन किराया नीति पर वित्तीय रिपोर्ट में खुलासा
Ratna Netam
23 April 2026 12:51 PM IST

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Punjab.पंजाब: लुधियाना नगर निगम (MC) ने पिछले तीन वर्षों में पोकलेन मशीनों को किराए पर लेने पर 2 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए हैं। यह जानकारी नगर निगम की वित्तीय रिपोर्ट में सामने आई है, जिससे शहर में सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नगर निगम ने निर्माण, सड़क मरम्मत और जल निकासी जैसे विभिन्न कार्यों के लिए पोकलेन मशीनें किराए पर लीं। हालांकि, इस खर्च की उच्च राशि ने नागरिकों और विपक्षी नेताओं में चिंता पैदा कर दी है। उनका कहना है कि यदि मशीनों की खरीद पर ध्यान दिया जाता, तो लंबे समय में यह खर्च बचाया जा सकता था।
नगर निगम के अधिकारी इस खर्च को जरूरी बताते हैं। उन्होंने कहा कि पोकलेन मशीनों को समय पर उपलब्ध कराना और विभिन्न निर्माण कार्यों को तेज़ी से पूरा करना उनकी प्राथमिकता थी। उन्होंने कहा, “किराए पर मशीनें लेने से कार्य समय पर पूरे हुए और आपातकालीन मरम्मत में तेजी आई।”
विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक भारी उपकरणों को किराए पर लेना महंगा पड़ सकता है। उनका कहना है कि नगर निगम को ऐसी मशीनों की लागत-लाभ विश्लेषण करना चाहिए और जहां संभव हो, मशीनों की खरीद पर विचार करना चाहिए।
नगर निगम के इस खर्च की समीक्षा से यह भी सामने आया है कि मशीनों का उपयोग कई बार सीमित रहा। कुछ रिपोर्टों में यह उल्लेख है कि पोकलेन मशीनें कई बार बिना पूर्ण कार्य के भी किराए पर रही। इससे यह सवाल उठता है कि क्या किराए पर ली गई मशीनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया गया।
स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता भी इस खर्च पर टिप्पणी कर रहे हैं। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग पारदर्शी और जिम्मेदार तरीके से होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम से मांग की है कि भविष्य में ऐसे खर्च की योजना बनाते समय अधिक पारदर्शिता और योजना बनाई जाए।
वित्तीय रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नगर निगम ने पोकलेन मशीनों के किराए पर खर्च को विभिन्न विभागों में विभाजित किया। निर्माण विभाग, जल निकासी विभाग और सड़क विभाग ने अपनी जरूरत के अनुसार मशीनें लीं। अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक विभाग ने आवश्यकतानुसार मशीन का उपयोग किया और सभी खर्च मानक दरों के अनुसार किए गए।
अंततः, लुधियाना नगर निगम का यह खर्च शहर में सार्वजनिक संसाधनों के उपयोग और वित्तीय योजना पर नए सवाल खड़े करता है। यह मामला भविष्य में नगर निगम की मशीन खरीद और किराए की नीति को अधिक पारदर्शी और आर्थिक रूप से प्रभावी बनाने की आवश्यकता को उजागर करता है।
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