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Chandigarh चंडीगढ़। पंजाब लोक भवन में मंगलवार शाम लोहड़ी का त्योहार बेहद उत्साह और पारंपरिक अंदाज में मनाया गया। इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने कार्यक्रम की मेजबानी की, जिन्होंने त्योहार की सांस्कृतिक गरिमा और सामुदायिक एकता को रेखांकित किया। समारोह में हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा विधानसभा अध्यक्ष हरविंदर कल्याण, पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, हरजोत सिंह बैंस और संजीव अरोड़ा, राज्यसभा सदस्य डॉ. अशोक मित्तल और एस. सतनाम सिंह संधू, चंडीगढ़ की मेयर हरप्रीत कौर बबला, चंडीगढ़ के मुख्य सचिव एच. राजेश प्रसाद, पंजाब के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इन गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी ने लोहड़ी को एक क्षेत्रीय उत्सव से ऊपर उठाकर सामाजिक सद्भाव का प्रतीक बना दिया।
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने लोहड़ी की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह त्योहार केवल फसल की शुरुआत का प्रतीक नहीं है, बल्कि पंजाबी संस्कृति, सामुदायिक एकता और सभ्यतागत मूल्यों का संरक्षण भी करता है। उन्होंने कहा, "ऐसे समारोह सद्भाव को बढ़ावा देते हैं, सामुदायिक संबंधों को मजबूत करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए हमारी विरासत को जीवंत रखते हैं।" मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान और नायब सिंह सैनी ने भी त्योहार की खुशियां बांटीं और क्षेत्र में शांति, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।
कार्यक्रम में पंजाबी लोक नायक दुल्ला भट्टी (राय अब्दुल्ला खान भट्टी) की कहानी को याद किया गया, जिन्हें लोहड़ी के साथ जोड़ा जाता है। उन्होंने गरीबों और किसानों के हक के लिए संघर्ष किया था और आज भी उनकी गाथा पंजाबी लोककथाओं का अभिन्न हिस्सा है। नॉर्थ जोन कल्चरल सेंटर (एनजेडसीसी) द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम में लोहड़ी से जुड़े पारंपरिक लोक नृत्य जैसे भांगड़ा, गिद्दा और लोक गीत प्रस्तुत किए गए। पंजाब लोक भवन के लॉन को एक पारंपरिक विरासत गांव की तरह सजाया गया था, जिसमें मिट्टी के चूल्हे, रेवड़ी-गज्जक, मूंगफली और गुड़ की महक से पूरा माहौल त्योहारी हो उठा।
समारोह के अंत में गणमान्य व्यक्तियों और मेहमानों के लिए रात्रिभोज का आयोजन किया गया। रात्रिभोज में पारंपरिक पंजाबी व्यंजन जैसे मक्की की रोटी, सरसों का साग, दाल मखनी, लस्सी और मिठाइयां परोसी गईं। यह आयोजन पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के बीच सांस्कृतिक एकता का जीता-जागता उदाहरण बना।
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