पंजाब

कृषि और पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी किसानों को Ludhiana में सम्मान

Ratna Netam
9 May 2026 7:29 PM IST
कृषि और पर्यावरण संरक्षण में अग्रणी किसानों को Ludhiana में सम्मान
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Ludhiana.लुधियाना: लुधियाना में आयोजित एक विशेष इवेंट में राज्य में पराली जलाने की समस्या को कम करने में योगदान देने वाले 250 किसानों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर कृषि और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किसानों के प्रयासों को सराहा गया। कार्यक्रम का आयोजन राज्य कृषि विभाग और स्थानीय प्रशासन की संयुक्त पहल के तहत किया गया। अधिकारीयों ने बताया कि पंजाब में पराली जलाने की समस्या वर्षों से गंभीर रूप ले चुकी है, जिससे न केवल वायु प्रदूषण बढ़ता है, बल्कि स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। इस इवेंट का उद्देश्य किसानों को सकारात्मक विकल्प अपनाने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित करना था। समारोह में उपस्थित कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण और कृषि प्रबंधन को लेकर गंभीर है।
उन्होंने किसानों को पराली कटाई और निपटान के आधुनिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। मंत्री ने कहा, "हमारा उद्देश्य पराली जलाने की प्रथा को समाप्त करना है और किसानों को विकल्पों और तकनीकी सहायता प्रदान करना है।" 250 सम्मानित किसानों में वे शामिल थे जिन्होंने पराली को खेत में ही प्राकृतिक तरीके से निपटाने या इको-फ्रेंडली मशीनों के माध्यम से प्रबंधित करने में अग्रणी भूमिका निभाई। इन किसानों ने आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर पराली को कृषि भूमि के लिए उपयुक्त खाद में परिवर्तित किया। कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों और स्थानीय समाजसेवियों ने भी हिस्सा लिया।
उन्होंने किसानों को यह बताया कि पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं है, बल्कि यह मिट्टी की उर्वरता और स्थानीय पारिस्थितिकी को भी प्रभावित करता है। इसके साथ ही कृषि उत्पादकता और लंबी अवधि में किसान की आय पर भी असर पड़ता है। स्थानीय किसान प्रतिनिधि ने कहा, "यह सम्मान हमारी मेहनत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी को मान्यता देता है। हम आगे भी पराली जलाने से बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाएंगे और अन्य किसानों को प्रेरित करेंगे।" इस इवेंट के दौरान किसानों को प्रशस्ति पत्र, पुरस्कार राशि और कृषि उपकरण भी प्रदान किए गए। प्रशासन ने यह भी घोषणा की कि भविष्य में इस तरह के आयोजनों को नियमित रूप से आयोजित किया जाएगा ताकि और अधिक किसान पराली जलाने की प्रथा छोड़ें और स्थायी कृषि प्रथाओं को अपनाएं।
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