पंजाब

खैरा ने किया हाई कोर्ट के CBI जांच आदेश का स्वागत

Ratna Netam
5 Oct 2026 2:43 PM IST
खैरा ने किया हाई कोर्ट के CBI जांच आदेश का स्वागत
x
चंडीगढ: कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा ने सोमवार को पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश का स्वागत किया, जिसमें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने का निर्देश दिया गया है। यह मामला मुख्यमंत्री के OSD राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पंजाब के पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्रों से जुड़ा है। हाई कोर्ट ने CBI को आपराधिक मामला दर्ज कर जांच करने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
बातचीत में सुखपाल सिंह खैरा ने कहा कि कांग्रेस इस आदेश का स्वागत करती है। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने मामले को CBI को सौंपने के साथ एजेंसी से तय समय के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। खैरा ने इसे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े मामले में अदालत की ओर से दिए गए महत्वपूर्ण निर्देश के तौर पर पेश किया और कहा कि अब मामले की जांच केंद्रीय एजेंसी करेगी।
खैरा ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री के OSD राजबीर घुम्मन के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले को CBI को सौंपने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत ने जांच एजेंसी से दो महीने में रिपोर्ट मांगी है। कांग्रेस नेता ने आरोपों के संदर्भ में मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी की राजनीतिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने अपने बयान में अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान के प्रति वफादारी का दावा करने वाले लोगों का उल्लेख करते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े मामले पर हाई कोर्ट का आदेश सामने आ गया है।
मामले की पृष्ठभूमि में प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पंजाब के DGP को भेजे गए तीन पत्र हैं। रिपोर्टों के अनुसार, ED ने इन पत्रों के जरिए राजबीर सिंह घुम्मन और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने और आरोपों की जांच की मांग की थी। पंजाब पुलिस की ओर से कथित तौर पर मामला दर्ज नहीं किए जाने के बाद इस मुद्दे को हाई कोर्ट के सामने जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया। याचिका अधिवक्ता निखिल सराफ की ओर से दायर की गई थी।
ED से जुड़े पत्रों में जिन आरोपों का उल्लेख किया गया, उनमें सरकारी तबादलों और पोस्टिंग में कथित हस्तक्षेप, टेंडर से जुड़े मामलों में कथित अनियमितता और सरकारी दस्तावेजों तक कथित अवैध पहुंच जैसे आरोप शामिल हैं। कुछ रिपोर्टों में सरकारी नीतियों के पक्ष में बदलाव कराने के लिए कथित रूप से पैसे के लेन-देन और अन्य सरकारी लाभ दिलाने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। हालांकि, ये सभी आरोप हैं और जांच पूरी होने से पहले इन्हें सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।
हाई कोर्ट की सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले की जांच राज्य पुलिस के स्तर से आगे बढ़ाते हुए CBI को सौंपने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को निष्पक्ष जांच में CBI को पूरा सहयोग देना होगा। मुख्य न्यायाधीश अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रोहित कपूर की पीठ ने CBI को मामले में आपराधिक केस दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और दो महीने के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया।
हाई कोर्ट का यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी और अन्य लोगों के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित है। अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि ED की ओर से भेजे गए पत्रों के बावजूद राज्य स्तर पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई। याचिकाकर्ता ने इस मामले में स्वतंत्र जांच की मांग की थी। कोर्ट के आदेश के बाद अब पूरे मामले की जांच CBI के स्तर पर आगे बढ़ेगी।
मामले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आती रही हैं। विपक्षी दलों ने आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है, जबकि आम आदमी पार्टी की ओर से पहले इन आरोपों को राजनीतिक तौर पर प्रेरित बताया गया था। पार्टी से जुड़े नेताओं ने आरोप लगाने वालों से सबूत सार्वजनिक करने को कहा है। राजबीर घुम्मन की ओर से भी आरोपों को लेकर आपत्ति जताई गई है और उन्होंने पहले कानूनी नोटिस के माध्यम से आरोप लगाने वालों से साक्ष्य पेश करने को कहा था।
अब CBI की जांच पर सबकी नजर रहेगी। अदालत ने एजेंसी को दो महीने की समयसीमा दी है, इसलिए जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज, बयान, वित्तीय लेन-देन और अन्य संबंधित साक्ष्यों की भूमिका अहम होगी। यह भी स्पष्ट होगा कि ED द्वारा लगाए गए आरोपों में कितनी तथ्यात्मक पुष्टि होती है और किन आरोपों पर आगे कार्रवाई की जरूरत बनती है।
सुखपाल सिंह खैरा ने हाई कोर्ट के आदेश को कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण बताया और कहा कि अदालत ने मामले में निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ किया है। दूसरी ओर, अंतिम निष्कर्ष अब CBI की जांच और उसके बाद सामने आने वाली रिपोर्ट पर निर्भर करेगा। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद मामला एक नई जांच प्रक्रिया में प्रवेश कर गया है और अगले दो महीनों में आने वाली CBI रिपोर्ट इस पूरे विवाद की दिशा तय करने में अहम होगी।
Next Story