
Punjab पंजाब: भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने गुरुवार को पंजाब इकाई के नए अध्यक्ष के रूप में Kewal Singh Dhillon के नाम की घोषणा की। नियुक्ति के तुरंत बाद उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनावों में पंजाब में पार्टी की सरकार बनाने का दावा किया और इसे अपना मुख्य लक्ष्य बताया।
नई जिम्मेदारी मिलने पर केवल सिंह ढिल्लों ने पार्टी नेतृत्व का आभार जताया और कहा कि वे संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर भाजपा की पकड़ बढ़ाने के लिए काम करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका पहला उद्देश्य पंजाब में भाजपा की सरकार बनाना है और इसके लिए व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी।
ढिल्लों ने पंजाब की मौजूदा भगवंत मान सरकार पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब है। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) की सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही है और राज्य में “गुंडा राज” जैसी स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि जनता मौजूदा शासन से असंतुष्ट है और आने वाले चुनावों में बदलाव की मांग करेगी। ढिल्लों ने कहा कि भाजपा सत्ता में आने के बाद पंजाब को सभी क्षेत्रों में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम करेगी।
अपने बयान में उन्होंने विश्वास जताया कि 2027 के विधानसभा चुनावों के बाद भाजपा पंजाब में सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा, “एक बार जब हम पंजाब में सरकार बना लेंगे, तो हम इसे सभी क्षेत्रों में नंबर 1 राज्य बना देंगे।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि पश्चिम बंगाल के बाद अब पंजाब में भी भाजपा का कमल खिलेगा।
ढिल्लों ने प्रधानमंत्री Narendra Modi की नेतृत्व क्षमता की भी सराहना की और कहा कि भारत की तेज आर्थिक और विकासात्मक प्रगति उनके नेतृत्व में संभव हुई है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों और योजनाओं को देश के विकास का आधार बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में भाजपा संगठन को मजबूत करने के लिए यह नियुक्ति एक महत्वपूर्ण कदम है। पार्टी अब राज्य में अपनी पकड़ बढ़ाने और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में जनाधार बनाने की रणनीति पर काम कर सकती है।
ढिल्लों की नियुक्ति के बाद पंजाब की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना जताई जा रही है, जहां भाजपा आने वाले वर्षों में खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश करने की कोशिश करेगी।
कुल मिलाकर, केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति और उनके तीखे राजनीतिक बयानों ने पंजाब की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है, और 2027 के चुनावों से पहले मुकाबला और अधिक दिलचस्प होने की संभावना है।





