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गृह मंत्रालय (MHA) ने कहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण करतारपुर कॉरिडोर भारतीय तीर्थयात्रियों के लिए बंद रहेगा। सरकार का कहना है कि मौजूदा सुरक्षा हालात इसे फिर से खोलने की इजाज़त नहीं देते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार कहा है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' एक जारी प्रक्रिया है। करतारपुर कॉरिडोर के ज़रिए पाकिस्तान में गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने वाले तीर्थयात्रा मार्ग को मई 2025 में बंद कर दिया गया था। सरकार ने अब फिर से कहा है कि सुरक्षा हालात के कारण कॉरिडोर को दोबारा नहीं खोला जा सकता।
सिख धार्मिक संगठनों और सांसदों ने केंद्र से कॉरिडोर को फिर से खोलने की बार-बार अपील की है और सिख समुदाय के लिए इसके गहरे धार्मिक और भावनात्मक महत्व का ज़िक्र किया है। पाकिस्तान का कहना है कि उसकी तरफ का कॉरिडोर खुला है और इस रास्ते को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए। यह कॉरिडोर पंजाब में डेरा बाबा नानक को पाकिस्तान के नारोवाल ज़िले में स्थित गुरुद्वारा दरबार साहिब से जोड़ता है।
हाल ही में, विदेश मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या सरकार को सिख समुदाय के नेताओं से इस रास्ते को 'जल्द फिर से खोलने' के लिए कोई अनुरोध मिला है, क्योंकि इसका 'बहुत ज़्यादा धार्मिक और भावनात्मक महत्व' है। इसके जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि 'मौजूदा सुरक्षा हालात के कारण कॉरिडोर को बंद रखना ज़रूरी है'। भारतीय तीर्थयात्रियों को कॉरिडोर से यात्रा करने की इजाज़त देने वाला समझौता 24 अक्टूबर 2019 को शुरुआती पांच साल की अवधि के लिए किया गया था। बाद में 2025 में कॉरिडोर को बंद कर दिया गया। कोविड-19 के फैलाव को रोकने के एहतियाती उपाय के तौर पर मार्च 2020 में भी इस रास्ते को कुछ समय के लिए बंद किया गया था। इसके उद्घाटन के बाद से लगभग 1.3 लाख श्रद्धालु इस कॉरिडोर का इस्तेमाल कर चुके हैं। यह गुरुद्वारा दरबार साहिब की वीज़ा-मुक्त और उसी दिन वापसी वाली यात्रा की सुविधा देता है।
गुरु नानक की 550वीं जयंती के मौके पर नवंबर 2019 में इस कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया था। दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के बावजूद, इसे भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों के आपसी संपर्क और सांस्कृतिक जुड़ाव के एक पुल के तौर पर देखा गया था। इसके निर्माण को कई लोगों ने भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक संभावित नए अध्याय के तौर पर सराहा था और उम्मीद जताई थी कि इस पहल से बनी सद्भावना राजनयिक संबंधों को बेहतर बनाने में योगदान दे सकती है। पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी यह सुझाव दिया था कि यह कॉरिडोर दोनों देशों के बीच बेहतर आर्थिक संबंधों की दिशा में पहला कदम हो सकता है।
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