पंजाब

Jalandhar: सरप्लस स्टाफ शिफ्टिंग पर टीचर्स नाराज़

Ratna Netam
13 April 2026 2:10 PM IST
Jalandhar: सरप्लस स्टाफ शिफ्टिंग पर टीचर्स नाराज़
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Jalandhar.जालंधर: पंजाब के जालंधर में ‘सरप्लस’ स्कूल स्टाफ को अन्य स्कूलों में शिफ्ट करने के शिक्षा विभाग के कदम को लेकर शिक्षकों में नाराज़गी देखने को मिल रही है। इस फैसले के खिलाफ कई शिक्षकों ने असंतोष जताते हुए इसे अव्यवहारिक और असंतुलित बताया है। शिक्षकों का कहना है कि बिना उचित समीक्षा और जमीनी स्थिति को समझे इस तरह का शिफ्टिंग निर्णय लागू करना स्कूलों के शैक्षणिक माहौल को प्रभावित कर सकता है। उनका तर्क है कि कई स्कूलों में पहले से ही स्टाफ की कमी है, और ऐसे में सरप्लस घोषित किए गए शिक्षकों को अन्य स्थानों पर भेजना समस्याओं को और बढ़ा सकता है।
शिक्षक संगठनों ने आरोप लगाया है कि यह निर्णय जल्दबाजी में लिया गया है और इसमें स्कूलों की वास्तविक जरूरतों का सही आकलन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के नाम पर यदि असंतुलित ट्रांसफर किए जाते हैं, तो इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ेगा।
कई शिक्षकों ने यह भी कहा कि सरप्लस की परिभाषा स्पष्ट नहीं है, जिसके कारण भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि पहले सभी स्कूलों की स्टाफ स्थिति का निष्पक्ष ऑडिट किया जाना चाहिए, उसके बाद ही किसी तरह का स्थानांतरण किया जाए।
वहीं, शिक्षा विभाग का तर्क है कि कुछ स्कूलों में आवश्यकता से अधिक स्टाफ मौजूद है, जबकि कई अन्य स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। ऐसे में संतुलन बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है, ताकि सभी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया का उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग करना और छात्रों को समान शिक्षा अवसर प्रदान करना है। हालांकि, इस कदम के क्रियान्वयन को लेकर फिलहाल असंतोष सामने आ रहा है।
शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और शिफ्टिंग प्रक्रिया को बिना सुधार के लागू किया गया, तो वे आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी बड़े बदलाव से पहले सभी हितधारकों से संवाद करना जरूरी होता है, ताकि नीतियों का प्रभाव जमीनी स्तर पर सकारात्मक रहे।
कुल मिलाकर, जालंधर में सरप्लस स्कूल स्टाफ को शिफ्ट करने के फैसले ने शिक्षकों में नाराज़गी पैदा कर दी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग इस विवाद को कैसे सुलझाता है और क्या शिक्षकों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कोई संशोधन किया जाता है या नहीं।
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