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Jalandhar: निवेदिता का गोल्ड मिशन, बोर्ड एग्जाम पीछे छोड़ दी

Ratna Netam
10 April 2026 4:33 PM IST
Jalandhar: निवेदिता का गोल्ड मिशन, बोर्ड एग्जाम पीछे छोड़ दी
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Jalandhar.जालंधर: युवा बॉक्सर निवेदिता ने अपनी पढ़ाई को पीछे छोड़कर बॉक्सिंग में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल्ड जीतने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए बोर्ड एग्जाम छोड़ने का साहसिक निर्णय लिया है। उनका यह कदम न केवल खेल जगत में बल्कि शिक्षा और करियर के बीच संतुलन बनाने की चुनौती पर भी एक चर्चा का विषय बन गया है।
निवेदिता, जो राज्य और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक जीत चुकी हैं, का कहना है कि बॉक्सिंग में उच्च स्तर तक पहुंचने के लिए पूरी तरह से समर्पण और समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बोर्ड एग्जाम और कड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम को एक साथ संभालना उनके लिए संभव नहीं था। इसलिए उन्होंने एग्जाम छोड़ने का कठिन निर्णय लिया, ताकि वे केवल खेल पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
उनके कोच और परिवार ने भी इस निर्णय में उनका समर्थन किया। कोच ने बताया कि निवेदिता में न केवल प्रतिभा है, बल्कि मानसिक दृढ़ता और अनुशासन भी है, जो उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता दिला सकता है। कोच ने कहा कि बोर्ड एग्जाम छोड़ने का फैसला खेल करियर के लिए एक रणनीतिक कदम है और यह उनकी मेहनत और समर्पण को दर्शाता है।
निवेदिता की यह कहानी अन्य युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन सकती है। कई युवा खिलाड़ी अपने करियर और पढ़ाई के बीच संघर्ष करते हैं। निवेदिता का निर्णय यह दर्शाता है कि उच्च स्तर की प्रतियोगिता में सफलता पाने के लिए कभी-कभी कठिन विकल्प चुनने पड़ते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि खेल और शिक्षा दोनों महत्वपूर्ण हैं, लेकिन खेल में उत्कृष्टता पाने के लिए कुछ समय सीमित करियर विकल्पों को प्राथमिकता देना भी जरूरी हो सकता है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ऐसे निर्णय लेने वाले खिलाड़ियों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन, मार्गदर्शन और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना चाहिए।
निवेदिता ने अपने आगामी प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं की योजना भी साझा की। उनका लक्ष्य अगले वर्ष आयोजित होने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग टूर्नामेंटों में पदक जीतना है। उन्होंने कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ही उन्हें गोल्ड तक पहुंचाएगा।
स्थानीय मीडिया और खेल संगठन निवेदिता की इस प्रतिबद्धता की सराहना कर रहे हैं। उनका कहना है कि युवा प्रतिभाओं को सही दिशा और अवसर मिलना चाहिए ताकि वे अपने सपनों को साकार कर सकें। निवेदिता का यह साहसिक कदम न केवल व्यक्तिगत सफलता की ओर है, बल्कि पूरे खेल समुदाय के लिए एक प्रेरणा भी है।
इस प्रकार, निवेदिता का निर्णय और उनका गोल्ड पर फोकस, युवा खिलाड़ियों में खेल के प्रति उत्साह और समर्पण को बढ़ावा देता है। यह दिखाता है कि उच्च स्तर की सफलता पाने के लिए कठिन फैसले लेना कभी-कभी आवश्यक होता है, और इच्छाशक्ति और समर्पण के साथ लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।
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