पंजाब

जालंधर मंडियों का हाल बेहाल: Pargat Singh

Ratna Netam
18 April 2026 12:18 PM IST
जालंधर मंडियों का हाल बेहाल: Pargat Singh
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Punjab.पंजाब: पंजाब के जालंधर जिले में मंडियों की अव्यवस्था को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ नेता Pargat Singh ने हाल ही में विभिन्न अनाज मंडियों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गहरी चिंता जताई और सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
दौरे के दौरान Pargat Singh ने पाया कि कई मंडियों में गेहूं की फसल खुले आसमान के नीचे पड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि न तो पर्याप्त बारदाना उपलब्ध है और न ही बारिश से बचाव के लिए कोई पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मौसम में अचानक बदलाव की स्थिति में किसानों की मेहनत पर पानी फिर सकता है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने अधिकारियों और संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हर साल फसल सीजन के दौरान ऐसी समस्याएं सामने आती हैं, लेकिन फिर भी कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता। Pargat Singh ने कहा कि सरकार को चाहिए कि वह समय रहते मंडियों में पर्याप्त बारदाना, तिरपाल और शेड की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को परेशानी न झेलनी पड़े।
मंडी में मौजूद किसानों ने भी अपनी समस्याएं खुलकर रखीं। उनका कहना था कि वे कई दिनों से अपनी फसल लेकर मंडी में बैठे हैं, लेकिन न तो समय पर खरीद हो रही है और न ही उचित सुविधाएं मिल रही हैं। बारिश का खतरा लगातार बना हुआ है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ गई है। किसानों ने बताया कि अगर फसल भीग जाती है, तो उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ेगा और उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाएगा।
इस मौके पर Pargat Singh ने आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएंगे और किसानों के हितों की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि मंडियों की व्यवस्था में सुधार करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में मंडियों की बेहतर व्यवस्था बेहद जरूरी है। अगर समय पर उचित इंतजाम नहीं किए गए, तो इसका सीधा असर किसानों की आय और राज्य की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, जालंधर की मंडियों की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर सरकार और प्रशासन की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि Pargat Singh द्वारा उठाए गए मुद्दों पर कितनी जल्दी कार्रवाई होती है और किसानों को राहत मिल पाती है या नहीं।
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