पंजाब

Jalandhar: दृष्टिबाधित छात्रों की डिजिटल स्किल बढ़ाने की पहल

Ratna Netam
27 April 2026 2:22 PM IST
Jalandhar: दृष्टिबाधित छात्रों की डिजिटल स्किल बढ़ाने की पहल
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Jalandhar.जालंधर: जालंधर में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए 10 दिन की विशेष डिजिटल ट्रेनिंग का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य दृष्टिबाधित छात्रों को डिजिटल उपकरणों और तकनीकों में निपुण बनाना था, ताकि वे शिक्षा और करियर के क्षेत्र में अधिक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बन सकें। इस 10 दिन के प्रशिक्षण में छात्रों को कंप्यूटर, इंटरनेट, ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म, मोबाइल एप्लिकेशन और अन्य डिजिटल साधनों के प्रयोग की जानकारी दी गई। प्रशिक्षकों ने छात्रों को डिजिटल सुरक्षा, डेटा सुरक्षा और ऑनलाइन संचार की विधियों के बारे में भी मार्गदर्शन किया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 50 से अधिक दृष्टिबाधित छात्र भाग लेने आए। प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत सहायता और तकनीकी मदद प्रदान की गई, ताकि वे डिजिटल उपकरणों को आसानी से समझ और उपयोग कर सकें।
प्रशिक्षकों ने छात्रों को विभिन्न सॉफ्टवेयर और एप्लिकेशन का इस्तेमाल करने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए। कार्यक्रम के आयोजकों ने कहा कि यह पहल दृष्टिबाधित छात्रों को शिक्षा और करियर के अवसरों में अधिक भागीदारी का अवसर देती है। उन्होंने बताया कि डिजिटल स्किल्स का ज्ञान छात्रो के आत्मविश्वास को बढ़ाता है और उन्हें समाज में समान रूप से प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाता है। छात्रों ने प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न ऑनलाइन टूल्स और प्लेटफॉर्म का अभ्यास किया। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम से उन्हें कंप्यूटर और मोबाइल तकनीक के प्रयोग में अधिक सुविधा और आत्मनिर्भरता मिली है। कई छात्रों ने कहा कि अब वे ऑनलाइन शिक्षा, नौकरी खोज और अन्य डिजिटल सेवाओं का उपयोग आसानी से कर पाएंगे।
स्थानीय अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने इस कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम समाज में दृष्टिबाधित छात्रों को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। उन्होंने भविष्य में और अधिक छात्रों तक इस तरह की डिजिटल ट्रेनिंग पहुंचाने की योजना की भी घोषणा की। शिक्षक और प्रशिक्षक इस कार्यक्रम के दौरान छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों पर ध्यान देने के लिए तत्पर रहे। उन्होंने छात्रों को डिजिटल उपकरणों के सुरक्षित और प्रभावी उपयोग की जानकारी दी और उनकी समस्याओं का समाधान किया। इस पहल ने न केवल छात्रों की तकनीकी क्षमता बढ़ाई, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और समाज के सक्रिय सदस्य बनने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के अंत में छात्रों को डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदान किए गए, जिससे उनकी उपलब्धि और सीखने की प्रक्रिया को मान्यता मिली।
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