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PUNJAB पंजाब: देशभर में आज 1984 के सिख विरोधी दंगों की बरसी पर सिख समुदाय ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। राजधानी जयपुर में भी गुरुद्वारों और सिख संगठनों की ओर से शांति सभाएं और प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान सिख समुदाय के सदस्यों ने कहा कि 31 अक्टूबर का दिन सिख समाज के लिए “ब्लैक डे” (काला दिन) के रूप में याद किया जाता है, जब हजारों निर्दोष सिखों को राजनीतिक प्रतिशोध की आग में झोंक दिया गया था। एक सिख प्रतिनिधि ने भावुक होते हुए कहा, “आज भी सिख समुदाय के दिलों में वो जख्म ताज़ा हैं। कई माताओं ने अपने बेटे खो दिए, कई घर उजड़ गए। यह केवल एक समुदाय नहीं, बल्कि इंसानियत के खिलाफ अपराध था।” उन्होंने कहा कि आज का दिन न्याय और समानता की मांग को दोहराने का प्रतीक है।
गुरुद्वारों में की गई अरदास, मोमबत्तियां जलाकर दी श्रद्धांजलि
जयपुर के राजापार्क, आदर्श नगर और सांगानेर स्थित गुरुद्वारों में श्रद्धांजलि सभाएं हुईं, जहां श्रद्धालुओं ने शहीदों की याद में मोमबत्तियां जलाईं और कीर्तन किया। इस अवसर पर सिख प्रतिनिधियों ने कहा कि 1984 के दंगों के ज़िम्मेदार लोगों को सज़ा देने में आज भी न्याय अधूरा है।
“न्याय की लड़ाई अब भी जारी”
स्थानीय सिख सभा के अध्यक्ष ने कहा कि “हमारे समाज ने हमेशा देश की सेवा की है, लेकिन 1984 की हिंसा ने हमारे विश्वास को गहरी चोट पहुंचाई। इतने वर्षों बाद भी पीड़ित परिवारों को पूरा न्याय नहीं मिल पाया है। सरकारों ने वादे तो किए, लेकिन जमीनी स्तर पर बहुत कुछ बाकी है।” उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
युवा पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने की पहल
कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित करते हुए बुजुर्ग सिख नेताओं ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को इस इतिहास से अवगत कराना जरूरी है ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न दोहराई जाए। उन्होंने कहा कि “हम नफरत नहीं, इंसाफ और शांति चाहते हैं। सिख धर्म हमें माफ करना सिखाता है, लेकिन भूलना नहीं।”
सिख समाज ने दी एकता का संदेश
जयपुर में हुए कार्यक्रमों में विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों ने भी हिस्सा लिया और सिख भाइयों के साथ एकजुटता दिखाई। आयोजकों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं समाज को विभाजित करती हैं, जबकि जरूरत एकता और भाईचारे की है।
सरकार से अपील – इतिहास को सिखाया जाए सच्चाई के साथ
सिख प्रतिनिधियों ने मांग की कि स्कूलों और विश्वविद्यालयों में 1984 के दंगों का सही इतिहास पढ़ाया जाए ताकि आने वाली पीढ़ी सच जान सके और communal harmony को बनाए रखने का महत्व समझे।
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