
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने जेल में बंद जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल देने की मांग को लेकर राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को पत्र लिखा है। मुख्यमंत्री ने यह मांग मानवीय आधार पर की है और हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने की अनुमति देने की अपील की है। इस घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है, क्योंकि हवारा लंबे समय से राज्य की संवेदनशील राजनीतिक और पंथिक राजनीति से जुड़े मुद्दों में एक प्रमुख नाम रहा है।
मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल को लिखे पत्र में हवारा की मां की बिगड़ती तबीयत का हवाला दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हवारा की मां की उम्र करीब 81 वर्ष है और उनकी स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है। इसी मानवीय आधार पर मुख्यमंत्री ने 10 दिन की पैरोल की मांग की है।
बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा
जगतार सिंह हवारा पूर्व पंजाब मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए हैं और उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। 31 अगस्त 1995 को चंडीगढ़ में हुए बम विस्फोट में बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में हवारा को दोषी ठहराया गया था।
हवारा फिलहाल दिल्ली की मंडोली जेल में बंद हैं। उनकी पैरोल का मामला पहले भी अदालतों और प्रशासन के समक्ष उठता रहा है। जनवरी 2026 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अधिकारियों को उनकी पैरोल संबंधी लंबित मांग पर जवाब देने के लिए समयबद्ध प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया था।
इसके बाद जुलाई 2026 में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी हवारा की पैरोल याचिका पर समयबद्ध तरीके से निर्णय लेने के निर्देश दिए। अदालत ने मंडोली जेल के अधीक्षक को उनकी पैरोल संबंधी मांग चंडीगढ़ प्रशासन के गृह सचिव को भेजने और संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट लेने की प्रक्रिया तय की थी।
मां से मिलने के मानवीय आधार पर मांग
मुख्यमंत्री भगवंत मान की मौजूदा पहल का मुख्य आधार हवारा की मां की खराब सेहत है। सरकार की ओर से इसे मानवीय दृष्टिकोण से लिया गया कदम बताया गया है।
हवारा की पैरोल का मुद्दा पहले से ही सिख संगठनों और पंथिक समूहों के बीच चर्चा का विषय रहा है। फरवरी 2026 में भी पंजाब के एक धार्मिक-राजनीतिक जमावड़े में हवारा को उनकी मां से मिलने के लिए पैरोल देने की मांग उठी थी। उस समय प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से इस मामले में शीघ्र निर्णय लेने की अपील की थी।
इससे स्पष्ट है कि हवारा की पैरोल की मांग केवल कानूनी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रही है, बल्कि इसका सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव भी रहा है।
राजनीतिक मायने पर भी चर्चा
मुख्यमंत्री के इस कदम के बाद पंजाब के राजनीतिक हलकों में इसके संभावित राजनीतिक प्रभावों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। पंजाब में सिख पंथिक मुद्दे संवेदनशील माने जाते हैं और विभिन्न राजनीतिक दल इन मुद्दों को लेकर समय-समय पर अपनी रणनीति बनाते रहे हैं।
हवारा का नाम भी पंथिक राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहा है। कुछ सिख संगठन उन्हें ‘बंदी सिंहों’ से जुड़े व्यापक मुद्दे के संदर्भ में देखते हैं, जबकि कानूनी रूप से वह पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए व्यक्ति हैं।
ऐसे में मान सरकार की ओर से पैरोल की मांग को राजनीतिक चश्मे से भी देखा जा रहा है। हालांकि मुख्यमंत्री की ओर से इसका आधार मानवीय बताया गया है और पत्र में मां की खराब सेहत को प्रमुख कारण बनाया गया है।
पहले भी उठती रही है पैरोल की मांग
हवारा की पैरोल का मामला नया नहीं है। उनकी ओर से मां से मिलने और स्वास्थ्य संबंधी मानवीय परिस्थितियों का हवाला देकर पैरोल की मांग पहले भी की गई है।
जुलाई में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की कार्यवाही में भी हवारा की 81 वर्षीय मां की तेजी से बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति का उल्लेख हुआ था। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को उनकी पैरोल अर्जी पर निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि पैरोल का फैसला केवल राज्य सरकार के स्तर पर नहीं होता। इसमें जेल प्रशासन, संबंधित सरकारों और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न स्तरों की भूमिका होती है।
राज्यपाल के फैसले पर नजर
अब मुख्यमंत्री भगवंत मान के पत्र के बाद निगाहें राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के अगले कदम पर हैं। पैरोल के लिए कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। हवारा की सजा और उनके मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए निर्णय कई स्तरों पर विचार के बाद लिया जाना तय माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री की मांग के पीछे मानवीय कारण प्रमुख हैं, लेकिन पंजाब की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में इसके व्यापक राजनीतिक प्रभाव से इनकार नहीं किया जा सकता। आने वाले समय में पंथिक संगठन, विपक्षी दल और अन्य राजनीतिक समूह इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकते हैं।
संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की पहल
जगतार सिंह हवारा का मामला पंजाब के इतिहास के सबसे संवेदनशील आपराधिक और राजनीतिक मामलों में से एक से जुड़ा है। एक ओर अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा और दूसरी ओर उनकी मां की बिगड़ती सेहत जैसे मानवीय पहलू हैं। यही वजह है कि पैरोल का मुद्दा कानूनी प्रक्रिया के साथ-साथ भावनात्मक और राजनीतिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण बन जाता है।
फिलहाल मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल से 10 दिन की पैरोल की अपील की है। अंतिम फैसला संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होना है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्यपाल और संबंधित अधिकारी इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं और क्या हवारा को अपनी बीमार मां से मिलने के लिए अस्थायी रिहाई मिलती है।





