पंजाब

आईजी राकेश अग्रवाल हटाए गए, पटियाला हिंसा के बाद सरकार का बड़ा फैसला

jantaserishta.com
30 April 2022 4:18 AM GMT
आईजी राकेश अग्रवाल हटाए गए, पटियाला हिंसा के बाद सरकार का बड़ा फैसला
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पटियाला: पटियाला में खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च के दौरान शिवसेना (बालासाहब) के कार्यकर्ताओं और खालिस्तान समर्थकों के बीच शुक्रवार को हुई झड़प के बाद शहर में तनाव है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पटियाला में 9:30 से शाम 6:00 बजे तक इंटरनेट बंद कर दिया गया है. अफवाहों को फैलने से रोकने के लिए पंजाब सरकार के गृह विभाग ने आदेश जारी किए हैं. वहीं, पटियाला आईजी राकेश अग्रवाल को हटा दिया गया है.

हिंदू संगठनों ने आज पटियाला बंद का आह्वान किया है. साथ ही काली माता मंदिर पर हमले के दोषियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर धरना, रोष मार्च का भी आह्वान किया है. वहीं, पटियाला एसएसपी नानक सिंह ने कहा कि पटियाला में हालात पूरी तरह नियंत्रण में है. उन्होंने लोगों से किसी भी तरह के अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की.
उधर, हिंदू संगठन की घोषणा के बाद शहर में ऐहतियातन भारी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है. शनिवार सुबह पटियाला के सीनियर एसपी नानक सिंह ने भारतीय हिंदू सुरक्षा समिति के प्रधान गिरिजी महाराज से उनके ऑफिस में मुलाकात की.
बता दें कि हिंदू संगठन उन खालिस्तानी समर्थकों की गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं जिन्होंने काली माता मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की और परिसर के पास पथराव किया. मार्च की अगुवाई करने वाले हरीश सिंगला की कार पर पथराव भी किया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने शुक्रवार शाम 7 बजे से शनिवार सुबह 6 बजे तक के लिए कर्फ्यू लगा दिया था.
घटना के खिलाफ शिवसेना हिंदुस्तान नाम के एक हिंदू संगठन ने 30 अप्रैल यानी आज पटियाला बंद का आह्वान किया है. शिवसेना हिंदुस्तान के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहा है कि खालिस्तान के खिलाफ मार्च में काली देवी के मंदिर का कुछ भी लेना-देना नहीं था. खालिस्तान समर्थकों ने मंदिर पर हमला करके मंदिर की बेअदबी की है. उन्होंने खालिस्तान समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए बंद का ऐलान किया है.
पटियाला में हुई झड़प की इस घटना को लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नानक सिंह ने बताया था कि खालिस्तान विरोधी मार्च के दौरान हुई हिंसा में चार लोग घायल हुए हैं. उन्होंने बताया कि घायलों में दो पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. एसएसपी ने कहा कि जिस प्रोटेस्ट मार्च के दौरान झड़प हुई, उसकी अनुमति नहीं दी गई थी.
झड़प के दौरान लोगों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया और फायरिंग भी की. इसे लेकर उन्होंने कहा कि ड्यूटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही हालात को नियंत्रित करने के लिए जो भी सही कदम थे, उठाए गए.
एक दिन पहले ही शिवसेना (बालासाहब) के कार्यकारी अध्यक्ष हरीश सिंगला ने खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च का ऐलान करते हुए किया था. उन्होंने कहा था कि शिवसेना, पंजाब को खालिस्तान नहीं बनने देगी. सिंगला के ऐलान के मुताबिक शुक्रवार को बड़ी तादाद में लोग तय जगह पर जमा हुए और खालिस्तान मुर्दाबाद मार्च निकला.
इस मार्च में जो लोग शामिल थे, वे खालिस्तान विरोधी नारे लगाते हुए चल रहे थे. खालिस्तान विरोधी नारे लगाते चल रहे लोगों के विरोध में खालिस्तान समर्थक संगठनों के लोग भी आ गए. खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाने लगे. दोनों गुट आमने-सामने हुए तो तलवारें लहराई जाने लगीं. पुलिस ने बैरिकेड कर रोकने की कोशिश की लेकिन वो नाकाफी साबित होने लगा. पुलिस को अंत में बल प्रयोग करना पड़ा.
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