पंजाब

होशियारपुर खनन मामला: CBI जांच और ड्रोन सर्वे के हाई कोर्ट ने दिए निर्देश

Kiran
10 Oct 2026 10:44 AM IST
होशियारपुर खनन मामला: CBI जांच और ड्रोन सर्वे के हाई कोर्ट ने दिए निर्देश
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पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को होशियारपुर ज़िले में बड़े पैमाने पर कथित अवैध माइनिंग की शुरुआती जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही, कोर्ट ने प्रभावित इलाकों में समय के साथ हुए बदलावों का पता लगाने के लिए विस्तृत ड्रोन सर्वे और 3D सैटेलाइट इमेजिंग कराने को भी कहा है। ये निर्देश होशियारपुर के चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट-सह-सेक्रेटरी, डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (DLSA) की रिपोर्ट के बाद दिए गए। इस रिपोर्ट में कई जगहों पर बड़े पैमाने पर माइनिंग के आरोपों की पुष्टि हुई थी और संकेत मिले थे कि माइनिंग की गहराई 20 से 110 फ़ीट के बीच थी। चीफ़ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की बेंच ने कहा कि वे "प्रथम दृष्टया इस बात से सहमत हैं कि संबंधित अधिकारी, जिन्हें इस तरह की बड़े पैमाने पर और बेरोकटोक अवैध माइनिंग को रोकने की ज़िम्मेदारी निभानी थी, वे अपनी ज़िम्मेदारियां निभाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं"।
बेंच ने आगे कहा कि "पर्यावरण को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाने के लिए ज़िम्मेदार लोगों के साथ राज्य के अधिकारियों की मिलीभगत" के आरोपों को हल्के में नहीं लिया जा सकता। जनहित को ध्यान में रखते हुए, बेंच ने माना कि किसी स्वतंत्र एजेंसी से विस्तृत और गहन जांच कराना उचित होगा। बेंच ने कहा, "इसलिए, हम प्रतिवादी-CBI को इस मामले में शुरुआती जांच करने का निर्देश देते हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि पर्यावरण को बड़े पैमाने पर और बेरोकटोक नुकसान पहुंचाने के लिए ज़िम्मेदार सभी लोगों की पहचान की जा सके और उन्हें जवाबदेह ठहराया जा सके।" ड्रोन सर्वे और सैटेलाइट इमेजिंग का आदेश CBI को यह भी निर्देश दिया गया कि वह विस्तृत ड्रोन सर्वे कराए और Google Earth, ISRO या किसी अन्य विश्वसनीय स्रोत से 3D सैटेलाइट इमेजिंग हासिल करे, ताकि "इलाके में समय-समय पर हुए बदलावों का स्पष्ट रूप से पता लगाया जा सके"।
बेंच ने स्पष्ट किया कि जांच को आसान बनाने और सर्वे व सैटेलाइट इमेजिंग पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए एजेंसी ज़िला प्रशासन, माइंस और जियोलॉजी विभाग, विशेषज्ञ निकायों और संस्थानों, और केंद्र सरकार के किसी भी विभाग या मंत्रालय से मदद ले सकती है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि "हमारे द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने के लिए ज़रूरी सभी खर्च पंजाब राज्य द्वारा उठाए जाएंगे"। याचिकाकर्ता राहुल मनचंदा की ओर से वकील सौरव भाटिया, सौम्या नय्यर, जसइंदर सेखों और नवदीप खोखर पेश हुए।
DLSA की रिपोर्ट में गहरी खुदाई और जांच टीम को गुमराह करने की कथित कोशिशों का ज़िक्र है।
14 सितंबर की DLSA रिपोर्ट में कई गांवों में माइनिंग की बात कही गई है, जिनमें संधवाल, नौशहरा सिंबली, देवाल, सरियाना, वज़ीरान, गोधो, ब्रिंगली, धुलल, भाटेहर, ढोल कलोटा, अलेरा, अमरोह, बसंतपुर, आसिफपुर, जुगियाल, पारेलियन और सिपारियन शामिल हैं। कुछ जगहों पर खुदाई की गहराई का पता नहीं चल सका क्योंकि गड्ढे पानी से भरे हुए थे या उन जगहों तक पहुँचना मुश्किल था। रिपोर्ट में कहा गया है कि निरीक्षण टीम को ऐसे रास्ते मिले जो “ऐसे रास्ते नहीं लग रहे थे
राज्य के हलफनामे में 26 चालू क्रशर बताए गए, लेकिन कोई भी माइनिंग साइट चालू नहीं थी
कोर्ट ने पहले जानकारी मांगी थी क्योंकि रिकॉर्ड में रखी तस्वीरों से पहली नज़र में पहाड़ियों के कटाव और बड़े पैमाने पर माइनिंग का संकेत मिला था। अपने हलफनामे में, होशियारपुर के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर-सह-डिस्ट्रिक्ट माइनिंग ऑफिसर ने कहा कि जिले में मंज़ूरी प्राप्त कमर्शियल माइनिंग साइट, ज़मीन मालिक की माइनिंग साइट या क्रशर माइनिंग साइट में से कोई भी चालू नहीं थी। हलफनामे में यह भी बताया गया कि जिले में 31 स्टोन क्रशर रजिस्टर्ड थे, जिनमें से 26 चालू थे। इन क्रशरों के लिए कच्चे माल के स्रोत के बारे में कोर्ट के सामने कोई भरोसेमंद डेटा या जानकारी नहीं रखी गई।
बेंच ने कहा, “याचिकाकर्ता ने अपने जवाब के साथ सैटेलाइट इमेज और तस्वीरों सहित और भी सबूत रिकॉर्ड पर रखे हैं, जिनसे पहली नज़र में JCB मशीनों/टिपरों से बड़े पैमाने पर माइनिंग का संकेत मिलता है, जिसमें बड़े गड्ढे बनने और इलाके के पर्यावरण के पूरी तरह नष्ट होने की बात सामने आती है।”
पृष्ठभूमि
संविधान के आर्टिकल 226 के तहत दायर याचिका में होशियारपुर में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर हो रही अवैध माइनिंग की गहन, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई थी। इसमें माइंस एंड जियोलॉजी विभाग और पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप लगाया गया था।
सुनवाई के दौरान बेंच ने नोट किया कि राज्य ने याचिका दायर करने के याचिकाकर्ता के अधिकार (लोकस) पर सवाल उठाया था। यह देखते हुए कि वह याचिकाकर्ता की साख से संतुष्ट नहीं है, बेंच ने जनहित को ध्यान में रखते हुए मामले की जांच करने का फैसला किया। बेंच ने कहा, “कोर्ट के सामने जो मुख्य जनहित का मुद्दा उठाया गया है, वह हमें इस मामले में उठाए गए मुद्दे पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है, ताकि बड़े जनहित की रक्षा की जा सके।”
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