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Hoshiarpur होशियारपुर में एक जाने-माने आर्मी ऑफ़िसर की पुश्तैनी ज़मीन पर पंजाब सरकार ने सड़क बनाकर कब्ज़ा कर लिया था। इस घटना के पाँच दशक से ज़्यादा समय बाद, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह 'ज़मीन अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवज़ा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम' के तहत 10.5 मरला ज़मीन का अधिग्रहण करे।
यह मामला तब बेंच के सामने आया जब रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल सवनीत सिंह ने कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया। वे 1972 में होशियारपुर के खुड्डा में PWD विभाग द्वारा सड़क बनाने के कारण हुए ज़मीन पर कब्ज़े से परेशान थे।
यह आदेश जस्टिस जसगुरप्रीत सिंह पुरी और जस्टिस प्रविंद्र सिंह चौहान की डिवीज़न बेंच ने दिया। बेंच ने कहा कि ज़मीन के मालिक को 1972 से मुआवज़े की राशि पर सालाना 6 प्रतिशत की दर से साधारण ब्याज पाने का अधिकार है। कोर्ट ने राज्य सरकार पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। बेंच ने आगे कहा कि राज्य सरकार ज़मीन अधिग्रहण को इस शर्त पर निर्भर नहीं कर सकती कि ज़मीन का मालिक राज्य द्वारा ज़मीन के इस्तेमाल के लिए मुआवज़े या हर्जाने का अपना दावा छोड़ दे। कोर्ट ने माना कि यह शर्त कि याचिकाकर्ता ज़मीन के इस्तेमाल के लिए हर्जाने का दावा नहीं करेगा, "मानने योग्य नहीं" थी।
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