पंजाब

Punjab में होम्योपैथी संकट, कोटे ने खोली नई चुनौती

Ratna Netam
9 May 2026 12:47 PM IST
Punjab में होम्योपैथी संकट, कोटे ने खोली नई चुनौती
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Punjab.पंजाब: पंजाब में होम्योपैथी चिकित्सा प्रणाली को कोटे के विवादास्पद फैसले ने गंभीर संकट में डाल दिया है। चिकित्सा विशेषज्ञों, होम्योपैथी चिकित्सकों और शिक्षा संस्थानों का कहना है कि यह कदम प्रणाली की स्थिरता और भविष्य दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। पंजाब की होम्योपैथी व्यवस्था लंबे समय से राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सस्ती और भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा प्रदान कर रही है। लेकिन हाल ही में कोटे से संबंधित फैसले ने चिकित्सकों की भर्ती, शिक्षण और प्रशिक्षण में असमानताएं पैदा कर दी हैं। कई होम्योपैथी कॉलेजों और अस्पतालों ने चेतावनी दी है कि अगर इस निर्णय के आधार पर तुरंत सुधार नहीं किया गया, तो यह पूरे स्वास्थ्य ढांचे पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोटे के फैसले ने भर्ती प्रक्रिया और पदों के वितरण में अनिश्चितता पैदा कर दी है। होम्योपैथी के छात्र और प्रशिक्षक असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, सरकारी और निजी संस्थानों में होम्योपैथी चिकित्सा को मान्यता और संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। पंजाब होम्योपैथी चिकित्सक संघ के अध्यक्ष ने कहा, “हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित डॉक्टर और शिक्षक हैं, लेकिन कोटे के फैसले के कारण भर्ती और पदों में असंतुलन पैदा हो गया है। यह स्थिति होम्योपैथी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा दोनों को खतरे में डाल रही है।” उन्होंने सरकार से अपील की है कि वे इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करें और प्रणाली को बचाने के लिए ठोस कदम उठाएं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला केवल स्वास्थ्य क्षेत्र का नहीं है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। पंजाब में होम्योपैथी चिकित्सा लंबे समय से जनता में विश्वास और लोकप्रियता हासिल कर चुकी है। यदि प्रणाली में अस्थिरता बनी रहती है, तो इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में कठिनाई होगी। सरकार ने इस मुद्दे पर संज्ञान लिया है और एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो कोटे के फैसले से पैदा हुई समस्याओं का समाधान तलाशेगी। समिति में स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विशेषज्ञ और होम्योपैथी चिकित्सकों को शामिल किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता प्रणाली की स्थिरता और छात्रों तथा चिकित्सकों के अधिकारों की सुरक्षा होगी।
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