पंजाब
पंजाब को BBMB जल विवाद में केंद्र से बातचीत करने का हाईकोर्ट का निर्देश
Ratna Netam
8 May 2026 1:02 PM IST

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Punjab.पंजाब: पंजाब और हरियाणा के बीच बीबीएमबी (ब्यास-भाखड़ा-मलवा बोर्ड) जल बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने पंजाब सरकार से कहा कि वह इस विवाद को सुलझाने के लिए केंद्र सरकार से संपर्क करे और जल वितरण से जुड़ी समस्या का समाधान निकालने में सहयोग करे।
बीबीएमबी जल बंटवारे विवाद लंबे समय से दोनों राज्यों के बीच तनाव का कारण बना हुआ है। पंजाब का दावा है कि हरियाणा और केंद्र द्वारा जल बंटवारे के नियमों में पक्षपात किया जा रहा है, जिससे राज्य के किसानों और कृषि क्षेत्र को नुकसान हो रहा है। पंजाब ने कोर्ट में यह भी बताया कि कई बार केंद्र से बातचीत की कोशिशों के बावजूद समाधान नहीं निकला।
कोर्ट ने इस पर गंभीरता व्यक्त करते हुए कहा कि जल एक संवेदनशील और महत्वपूर्ण संसाधन है, और इसे लेकर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता किसानों और ग्रामीण इलाकों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। न्यायाधीश ने कहा, "केंद्र सरकार इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाए और दोनों राज्यों के हितों को संतुलित करते हुए समाधान निकाले।"
न्यायालय ने पंजाब सरकार को निर्देश दिया कि वह केंद्र से संपर्क करे और जल्द से जल्द समाधान के लिए ठोस कदम उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बीबीएमबी के संचालन और जल बंटवारे की पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी विवाद या कानूनी लड़ाई से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीबीएमबी जल बंटवारा विवाद केवल पंजाब और हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे उत्तर-पश्चिमी भारत में सिंचाई और जल प्रबंधन के मुद्दों को उजागर करता है। उनका कहना है कि इस तरह के विवादों में न्यायालय और केंद्र दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
कृषक संघों और स्थानीय संगठनों ने भी पंजाब सरकार से अपील की है कि वह जल बंटवारे के मुद्दे को प्राथमिकता के आधार पर हल करे। उनका कहना है कि मानसून और सिंचाई मौसम के दौरान जल की कमी गंभीर संकट पैदा कर सकती है।
पंजाब सरकार ने कोर्ट में यह भी बताया कि राज्य के किसानों के हित में जल वितरण की योजना को प्रभावी ढंग से लागू किया जाना चाहिए। सरकार ने केंद्र से संपर्क कर न केवल तत्काल समाधान की मांग की है, बल्कि भविष्य में विवाद से बचने के लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने का सुझाव भी दिया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जल बंटवारे में देरी या अव्यवस्था राज्य के सामाजिक और आर्थिक हितों को प्रभावित कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए और दोनों राज्यों के बीच विश्वास और सहयोग की भावना कायम रखनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि केंद्र और राज्य मिलकर इस विवाद का त्वरित समाधान नहीं निकालते, तो भविष्य में जल बंटवारे को लेकर बड़े पैमाने पर कानूनी और राजनीतिक संघर्ष पैदा हो सकता है।
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