
नई दिल्ली। पंजाब कांग्रेस में चल रही अंदरूनी कलह को खत्म करने के लिए पार्टी हाईकमान ने सख्त और संतुलित रणनीति अपनाई है। नेतृत्व ने साफ संकेत दिया है कि संगठन के भीतर गुटबाजी, दबाव की राजनीति और सार्वजनिक रूप से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। वहीं, नाराज नेताओं से बातचीत कर विवाद को शांत करने की कोशिश भी जारी रहेगी।
अगले विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब कांग्रेस में बढ़ती खींचतान पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय बन गई है। इसी को देखते हुए हाईकमान ने शीर्ष स्तर पर बातचीत का सिलसिला शुरू किया है। पार्टी ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को पंजाब कांग्रेस के विवाद को सुलझाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
पंजाब कांग्रेस प्रभारी महासचिव भूपेश बघेल ने संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल को प्रदेश में चल रही गुटबाजी और नेताओं के बीच मतभेदों से जुड़ी रिपोर्ट सौंपी है। इसके बाद पार्टी नेतृत्व की ओर से यह संदेश दिया गया है कि संगठन में अनुशासन सबसे ऊपर है और किसी भी नेता को दबाव बनाकर फैसले बदलवाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, कुछ नेताओं की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को बदलने की मांग और दबाव बनाया जा रहा था। इस पर हाईकमान ने स्पष्ट कर दिया है कि अध्यक्ष पद पर फैसला किसी दबाव या राजनीतिक खेमेबाजी के आधार पर नहीं लिया जाएगा। भूपेश बघेल ने भी संकेत दिया कि प्रदेश अध्यक्ष बदलना कोई साधारण प्रक्रिया नहीं है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि चुनावी तैयारियों के समय पार्टी के भीतर चल रही खींचतान से कार्यकर्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए हाईकमान अब सभी गुटों के नेताओं से बातचीत कर आपसी मतभेद खत्म करने की कोशिश करेगा। पार्टी का लक्ष्य है कि संगठन को एकजुट कर चुनावी मैदान में मजबूती से उतरा जाए।
हाईकमान ने जहां एक ओर नेताओं को अनुशासन में रहने का संदेश दिया है, वहीं दूसरी ओर नाराज नेताओं की समस्याओं को सुनने की रणनीति भी बनाई है। पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की टूट या बड़े विवाद से बचते हुए सभी पक्षों को साथ लेकर चलना चाहता है।
पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से नेताओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई चल रही है। कई बार सार्वजनिक मंचों पर भी नेताओं के बयान सामने आए हैं, जिससे पार्टी की अंदरूनी स्थिति उजागर हुई है। अब हाईकमान इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाकर संगठन को मजबूत करने की तैयारी में है।
कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि चुनाव से पहले एकजुटता बेहद जरूरी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठकें की जा सकती हैं और सभी पक्षों से बातचीत कर समाधान का रास्ता निकाला जाएगा।
फिलहाल हाईकमान का रुख साफ है कि संगठन में अनुशासनहीनता और दबाव की राजनीति को जगह नहीं दी जाएगी, लेकिन संवाद और सहमति के जरिए विवाद खत्म करने के प्रयास भी जारी रहेंगे।





