पंजाब

हरसिमरत ने उठाई प्रभावित परिवारों की आवाज

Kavita2
23 Sept 2026 11:38 AM IST
हरसिमरत ने उठाई प्रभावित परिवारों की आवाज
x

मानसा। पंजाब में नशे की समस्या को लेकर शिरोमणि अकाली दल (SAD) की वरिष्ठ नेता और बठिंडा सांसद हरसिमरत कौर बादल ने मंगलवार को मानसा और सरदुलगढ़ में महिला सम्मेलनों को संबोधित किया और 'इंसाफ मार्च' का नेतृत्व किया। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पंजाब की 'मावां-धीयां' यानी माताएं और बेटियां सरकार को नशे की समस्या खत्म करने की जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटने देंगी।

हरसिमरत कौर बादल ने दोनों स्थानों पर आयोजित मार्च के बाद कार्यकारी मजिस्ट्रेटों को ज्ञापन सौंपे। इसमें नशे के कारण प्रभावित परिवारों के लिए न्याय और प्रभावी पुनर्वास की मांग की गई। इसके साथ ही कुछ अन्य मामलों में जांच और कार्रवाई की मांग भी रखी गई।

मानसा और सरदुलगढ़ में महिला सम्मेलन

हरसिमरत कौर बादल ने मानसा और सरदुलगढ़ में आयोजित महिला सम्मेलनों में नशे की समस्या का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने दावा किया कि पंजाब में नशे के कारण कई परिवार गंभीर सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं और इसका असर महिलाओं पर भी पड़ रहा है।

उन्होंने महिलाओं से नशे के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की। बादल ने कहा कि नशे से किसी परिवार के युवा सदस्य के प्रभावित होने पर उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है और महिलाओं को कई स्तरों पर इसकी कीमत चुकानी पड़ती है।

उनके ये बयान SAD के राजनीतिक अभियान का हिस्सा हैं और इनमें राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की गई है।

'इंसाफ मार्च' का किया नेतृत्व

महिला सम्मेलनों के बाद हरसिमरत कौर बादल ने 'इंसाफ मार्च' का नेतृत्व किया। मार्च के जरिए नशे से प्रभावित परिवारों के लिए न्याय और पुनर्वास की मांग उठाई गई।

कार्यकारी मजिस्ट्रेटों को सौंपे गए ज्ञापन में नशे से प्रभावित परिवारों की मदद के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की गई। साथ ही पुलिस कार्रवाई से जुड़े कुछ मामलों और अन्य आरोपों की जांच की मांग भी शामिल रही।

इससे पहले 21 सितंबर को भी हरसिमरत ने रामपुरा फूल और नथाना में इसी मुद्दे पर महिलाओं की सभाओं को संबोधित करते हुए राज्यव्यापी अभियान शुरू किया था। वहां भी विरोध मार्च के बाद कार्यकारी मजिस्ट्रेटों को ज्ञापन सौंपे गए थे।

भगवंत मान सरकार पर साधा निशाना

हरसिमरत कौर बादल ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर नशे की समस्या से निपटने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पंजाब की महिलाएं इस मुद्दे पर जवाबदेही चाहती हैं।

SAD नेता ने यह भी दावा किया कि राज्य में नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं। हालांकि ये आरोप राजनीतिक दावे हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

दूसरी ओर भगवंत मान सरकार का कहना है कि उसने नशे के खिलाफ अभियान को तेज किया है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में अधिकारियों और पुलिस को 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान के तहत नशा बेचने वालों, सप्लायरों और तस्करों के खिलाफ कार्रवाई और तेज करने के निर्देश दिए थे।

नशा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की मांग

हरसिमरत कौर बादल की ओर से उठाए गए प्रमुख मुद्दों में नशे से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास शामिल है। उनका कहना है कि नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि जिन परिवारों ने इसके कारण सदस्य खोए हैं या आर्थिक-सामाजिक संकट झेला है, उनके लिए भी प्रभावी सहायता की व्यवस्था होनी चाहिए।

नशे की लत से प्रभावित व्यक्ति के उपचार के साथ परिवार के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास का सवाल भी महत्वपूर्ण है। इस मुद्दे को लेकर पंजाब की राजनीति में अलग-अलग दल लगातार सरकार पर दबाव बना रहे हैं।

सरकार का दावा- नशे के खिलाफ अभियान जारी

AAP सरकार ने विपक्ष के आरोपों के बीच कहा है कि पंजाब में नशे के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। सरकार के मुताबिक 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' के तहत पुलिस कार्रवाई के अलावा स्कूलों में रोकथाम कार्यक्रम, युवाओं की भागीदारी, सामुदायिक निगरानी और नशे से प्रभावित लोगों के उपचार तथा पुनर्वास पर भी काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 15 सितंबर को वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में नशे के खिलाफ अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए थे।

इस तरह नशे के मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के दावे एक-दूसरे से अलग हैं। विपक्ष जहां सरकारी प्रयासों को अपर्याप्त बता रहा है, वहीं सरकार अपनी कार्रवाई को व्यापक अभियान के रूप में पेश कर रही है।

विपक्ष के निशाने पर पंजाब सरकार

पंजाब में नशे की समस्या हाल के दिनों में राजनीतिक बहस का बड़ा विषय बनी हुई है। SAD के साथ अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर AAP सरकार को घेर रहे हैं।

हाल ही में BJP और AAP के बीच भी नशे की समस्या को लेकर आरोप-प्रत्यारोप सामने आए। BJP ने सरकार के नशा खत्म करने संबंधी समयबद्ध दावों पर सवाल उठाए, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पूर्व की SAD-BJP सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए विपक्ष पर पलटवार किया।

इससे साफ है कि विधानसभा चुनाव से पहले नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीतिक बहस के केंद्र में बना हुआ है।

SAD ने सख्त कानून की बात कही

हरसिमरत कौर बादल ने अपने संबोधन में कहा कि अगर SAD सत्ता में आता है तो नशा तस्करों के खिलाफ और सख्त कानून बनाने की दिशा में कदम उठाएगा। उन्होंने लंबी अवधि तक जमानत नहीं मिलने और दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा के प्रावधानों की बात कही। यह फिलहाल SAD की राजनीतिक घोषणा है, कोई लागू कानून नहीं।

उन्होंने नशा तस्करों की संपत्तियों पर कार्रवाई की बात भी कही। इन प्रस्तावों का स्वरूप भविष्य में किसी औपचारिक विधायी प्रस्ताव के सामने आने पर ही स्पष्ट होगा।

नशे के मुद्दे पर सियासी टकराव तेज

मानसा और सरदुलगढ़ में हरसिमरत कौर बादल के महिला सम्मेलन और इंसाफ मार्च ने नशे के मुद्दे पर जारी राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।

SAD की ओर से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, न्याय और सरकारी जवाबदेही की मांग उठाई जा रही है। वहीं पंजाब सरकार का कहना है कि नशे के नेटवर्क को खत्म करने के लिए पुलिस, प्रशासन और समाज को जोड़कर अभियान चलाया जा रहा है।

ऐसे में आने वाले समय में पंजाब में नशे की रोकथाम, पुनर्वास और सरकारी कार्रवाई के आंकड़े राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने रहने की संभावना है।

Next Story