पंजाब

अकाली गठबंधन पर हरदीप पुरी का बड़ा बयान

Kavita2
20 Sept 2026 10:12 AM IST
अकाली गठबंधन पर हरदीप पुरी का बड़ा बयान
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अमृतसर। पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। इसी बीच केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री और भाजपा नेता हरदीप सिंह पुरी ने पार्टी की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि फिलहाल भाजपा अकाली दल के साथ गठबंधन नहीं कर रही है। हालांकि भविष्य में दोनों दल साथ आते हैं तो गठबंधन पुराने समीकरण पर नहीं, बल्कि बराबरी की शर्तों पर होगा। गठबंधन पर अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

अमृतसर में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुरी ने कहा कि भाजपा अब पंजाब में पहले की तरह छोटे भाई या जूनियर पार्टनर की भूमिका स्वीकार नहीं करेगी। उनके मुताबिक यदि भविष्य में शिरोमणि अकाली दल के साथ चुनावी समझौता होता है तो सीटों के बंटवारे में समानता होनी चाहिए।

पुराना सीट बंटवारा स्वीकार नहीं

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल लंबे समय तक पंजाब में गठबंधन सहयोगी रहे हैं। उस दौर में विधानसभा चुनावों में अकाली दल अधिक सीटों पर और भाजपा सीमित सीटों पर चुनाव लड़ती थी। पुरी ने संकेत दिया कि पार्टी अब पुराने 22-23 सीटों वाले फॉर्मूले की ओर लौटने के पक्ष में नहीं है।

पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं। ऐसे में यदि भविष्य में दोनों दलों के बीच गठबंधन की बातचीत आगे बढ़ती है तो सीट बंटवारा सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक होगा। पुरी के बयान से यह साफ है कि भाजपा पुराने गठबंधन मॉडल के बजाय अधिक बराबरी वाली भागीदारी की बात कर रही है।

गठबंधन पर अंतिम फैसला नेतृत्व करेगा

हरदीप सिंह पुरी ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा और अकाली दल के बीच गठबंधन होगा या नहीं, इसका अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा। इसलिए उनके बयान को किसी गठबंधन की औपचारिक घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अभी दोनों पार्टियों की ओर से आगामी चुनाव के लिए संयुक्त सीट-बंटवारा समझौता घोषित नहीं किया गया है।

दूसरी ओर भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ ने हाल में कहा था कि पार्टी पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और शहरी के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी संगठन मजबूत किया जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि भाजपा फिलहाल स्वतंत्र रूप से पूरे राज्य में अपनी चुनावी तैयारी जारी रखे हुए है।

2020 में टूट गया था पुराना गठबंधन

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल का राजनीतिक गठबंधन करीब दो दशक से अधिक समय तक चला था। दोनों दल केंद्र और पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे। वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के मुद्दे पर अकाली दल ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का फैसला किया था। इसके बाद दोनों दलों ने पंजाब में अलग-अलग चुनावी रास्ता अपनाया।

अब 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दोनों पुराने सहयोगियों के दोबारा साथ आने की संभावनाओं को लेकर समय-समय पर अटकलें लगती रही हैं। पुरी के ताजा बयान ने इस चर्चा को एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में ला दिया है, हालांकि उन्होंने मौजूदा समय में गठबंधन की पुष्टि नहीं की है।

पंजाब में अपना आधार बढ़ाने में जुटी भाजपा

पिछले कुछ वर्षों में भाजपा पंजाब में अपने संगठन को विस्तार देने की कोशिश कर रही है। पार्टी शहरी क्षेत्रों में अपनी पारंपरिक मौजूदगी के साथ ग्रामीण इलाकों में भी संगठन को मजबूत करने पर जोर दे रही है।

भाजपा नेतृत्व ने आगामी चुनाव को ध्यान में रखते हुए राज्य में नशे, रोजगार, कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति बनाई है। पार्टी ने सितंबर में ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ भी शुरू की है।

नशे के मुद्दे पर भी बोले पुरी

अमृतसर दौरे के दौरान हरदीप सिंह पुरी ने पंजाब में नशे की समस्या का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नशे की समस्या से निपटने के लिए प्रयास करेगी। साथ ही उन्होंने रोजगार के अवसर बढ़ाने और स्थानीय उद्योगों से जुड़े मुद्दों पर भी बात की।

पुरी ने अमृतसर को पंजाब का महत्वपूर्ण धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक केंद्र बताते हुए स्थानीय उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयासों का उल्लेख किया।

पंजाब सरकार पर भी साधा निशाना

केंद्रीय मंत्री ने आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कानून-व्यवस्था और नशे के मुद्दे को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की। पुरी ने आरोप लगाया कि राज्य में आम लोगों के साथ पुलिसकर्मियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता की स्थिति है। ये भाजपा नेता की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।

AAP सरकार इन मुद्दों पर भाजपा के आरोपों का अलग-अलग मौकों पर विरोध करती रही है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कानून-व्यवस्था, नशा और रोजगार जैसे मुद्दे विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रचार में प्रमुखता से सामने आ रहे हैं।

बराबरी की साझेदारी पर भाजपा का जोर

पुरी के बयान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा भाजपा-अकाली दल के पुराने राजनीतिक समीकरण से जुड़ा है। उन्होंने साफ संकेत दिया कि यदि भविष्य में गठबंधन की स्थिति बनती है तो भाजपा पहले की तरह सीमित सीटों पर चुनाव लड़ने वाली सहयोगी की भूमिका स्वीकार नहीं करना चाहती।

हालांकि बराबरी का वास्तविक सीट-बंटवारा किस अनुपात में होगा, इस पर कोई औपचारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है। पंजाब में 117 विधानसभा सीटें होने के कारण किसी संभावित गठबंधन में सीटों की संख्या पर अलग से बातचीत करनी होगी।

फिलहाल भाजपा राज्य की सभी सीटों पर अपनी संगठनात्मक तैयारी कर रही है, जबकि संभावित अकाली-भाजपा गठबंधन को लेकर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। हरदीप सिंह पुरी के बयान ने इतना जरूर स्पष्ट किया है कि भविष्य में दोनों पुराने सहयोगी फिर साथ आते हैं तो भाजपा पुराने ‘जूनियर पार्टनर’ वाले समीकरण को दोहराने के पक्ष में नहीं है।

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