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Gurdaspur: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने जारी की ठंड से बचाव की गाइडलाइन

Admindelhi1
16 Jan 2026 6:46 PM IST
Gurdaspur: पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने जारी की ठंड से बचाव की गाइडलाइन
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गुरदासपुर: पंजाब भर में पिछले कई दिनों से जारी कड़ाके की सर्दी के कारण दिन और रात के तापमान में सामान्य से काफी गिरावट दर्ज की जा रही है। कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सैल्सियस से भी नीचे गिर गया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा आने वाले दिनों में घनी धुंध और जमीनी पाले (कोहरा) की भविष्यवाणी की गई है। इसके मद्देनजर पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पी.ए.यू.) लुधियाना और कृषि विभाग द्वारा किसानों के लिए फसलों की सुरक्षा संबंधी एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की गई है।

पी.ए.यू. के कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान ठंड और पाले के दौरान खेतों की फसलों, बागों, सब्जियों और पशुओं की विशेष देखभाल करने की आवश्यकता है। खासतौर पर सब्जियां और नए लगाए गए बाग ठंड और पाले से अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसी स्थिति में फसलों को हल्की सिंचाई देकर मिट्टी में नमी और तापमान को बरकरार रखा जा सकता है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर से मल्च या सरकंडों का उपयोग करके सब्जी के पौधों और फलदार पौधों को पाले से बचाया जा सकता है।

इस संबंध में जिला गुरदासपुर के मुख्य कृषि अधिकारी डा. रणधीर सिंह ठाकुर ने बताया कि गुरदासपुर क्षेत्र में इस समय दिन का तापमान लगभग 12 डिग्री सैल्सियस दर्ज किया जा रहा है, जबकि रात का तापमान घटकर 4 डिग्री सैल्सियस के आसपास पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान मौसम की स्थिति में गेहूं, गन्ना और सरसों जैसी मुख्य फसलों की हालत अभी तक संतोषजनक है, लेकिन लगातार ठंड और पाला बने रहने के कारण फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डा. ठाकुर ने किसानों को सलाह दी कि गेहूं की फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहें, ताकि पाले के प्रभाव से बचाव हो सके। सरसों की फसल में कीटों और बीमारियों की निगरानी जारी रखें और जरूरत पड़ने पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही कीटनाशकों का प्रयोग करें। गन्ने की फसल में भी नमी बनाए रखना बहुत जरूरी है, ताकि ठंड के कारण होने वाले नुकसान से बचा जा सके। पी.ए.यू. और कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे लगातार अपने खेतों का सर्वेक्षण करते रहें और मौसमी बदलावों से अवगत रहें। पशुपालकों को भी सलाह दी गई है कि वे पशुओं को ठंड से बचाने के लिए अंदर रखें और उनकी खुराक पोषण भरपूर रखी जाए, ताकि पशुओं के स्वास्थ्य पर ठंड का नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

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