
पंजाब : सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए मिड-डे मील की व्यवस्था संभालने वाले शिक्षकों को नए नियमों के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिक्षकों का कहना है कि सरकार की ओर से पोर्टल के माध्यम से लागू किए गए नए प्रावधानों में बिना जीएसटी नंबर वाले वेंडरों को भुगतान प्रक्रिया में जोड़ने में दिक्कत आ रही है।
इस समस्या का सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में देखने को मिल रहा है, जहां मिड-डे मील के लिए जरूरी सामान स्थानीय छोटे दुकानदारों से खरीदा जाता है। शिक्षकों का कहना है कि नई व्यवस्था के कारण सामान खरीद और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
पोर्टल पर वेंडर जोड़ने में आ रही समस्या
जानकारी के अनुसार, मिड-डे मील योजना के तहत स्कूलों में भोजन तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री की खरीद की जाती है।
नई व्यवस्था के तहत भुगतान प्रक्रिया को ऑनलाइन और पारदर्शी बनाने के लिए पोर्टल के माध्यम से वेंडरों की जानकारी दर्ज की जा रही है।
लेकिन शिक्षकों का कहना है कि जिन दुकानदारों के पास जीएसटी नंबर नहीं है, उन्हें पोर्टल पर जोड़ने में तकनीकी और प्रशासनिक दिक्कतें आ रही हैं।
ग्रामीण स्कूलों में बढ़ी परेशानी
ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में मिड-डे मील के लिए सामान अक्सर आसपास के छोटे दुकानदारों से खरीदा जाता है।
इन दुकानदारों में किराना व्यापारी, सब्जी विक्रेता, दूध और डेयरी उत्पाद बेचने वाले छोटे कारोबारी शामिल हैं।
इसके अलावा खाना बनाने के लिए ईंधन और अन्य जरूरी सामग्री भी स्थानीय स्तर पर खरीदी जाती है।
शिक्षकों का कहना है कि गांवों में काम करने वाले कई छोटे दुकानदार जीएसटी के दायरे में नहीं आते, इसलिए उनके पास जीएसटी पंजीकरण नहीं है।
शिक्षकों पर बढ़ा अतिरिक्त दबाव
मिड-डे मील की जिम्मेदारी निभाने वाले शिक्षकों का कहना है कि पढ़ाई के साथ उन्हें भोजन व्यवस्था की जिम्मेदारी भी संभालनी पड़ती है।
अब भुगतान प्रक्रिया में आ रही तकनीकी परेशानियों के कारण उनका काम और बढ़ गया है।
शिक्षकों का कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं हो पाया तो स्थानीय दुकानदारों से सामान लेना मुश्किल हो सकता है।
दुकानदारों के साथ भी समस्या
स्थानीय दुकानदार भी इस व्यवस्था से प्रभावित हो रहे हैं।
छोटे व्यापारियों का कहना है कि वे लंबे समय से स्कूलों को सामान उपलब्ध कराते आ रहे हैं, लेकिन जीएसटी नंबर की अनिवार्यता के कारण अब भुगतान प्रक्रिया में परेशानी आ सकती है।
उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों के लिए जीएसटी पंजीकरण कराना हमेशा आसान नहीं होता।
योजना की पारदर्शिता के लिए लागू हुए नियम
सरकार की ओर से ऑनलाइन भुगतान और वेंडर पंजीकरण की व्यवस्था का उद्देश्य मिड-डे मील योजना में पारदर्शिता लाना है।
नई प्रणाली के माध्यम से भुगतान प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और रिकॉर्ड को बेहतर तरीके से बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर आने वाली परेशानियों के कारण शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
समाधान की मांग
शिक्षकों ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमों में आवश्यक बदलाव किए जाएं।
उनका कहना है कि छोटे दुकानदारों को भुगतान प्रक्रिया से जोड़ने के लिए सरल विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
यदि समस्या का समाधान नहीं किया गया तो मिड-डे मील व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।
विभाग से राहत की उम्मीद
शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग इस मामले में जल्द कोई समाधान निकालेगा।
उनका कहना है कि बच्चों के भोजन से जुड़ी योजना में किसी भी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए।
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना और स्कूलों में उनकी उपस्थिति बढ़ाना है। ऐसे में शिक्षकों का कहना है कि प्रशासन को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए जिससे योजना सुचारू रूप से चलती रहे।





