पंजाब

Punjab में भूजल संकट गहराया, सरकार ने धान की सीधी बुवाई (DSR) बढ़ाने का लिया फैसला

Kavita2
25 May 2026 10:02 AM IST
Punjab में भूजल संकट गहराया, सरकार ने धान की सीधी बुवाई (DSR) बढ़ाने का लिया फैसला
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Punjab पंजाब: पंजाब देश के उन राज्यों में शामिल हो गया है जहां भूजल स्तर में सबसे तेजी से गिरावट दर्ज की जा रही है। स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने भूजल संरक्षण के लिए चावल की सीधी बुवाई (Direct Seeding of Rice - DSR) तकनीक को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। यह तकनीक पारंपरिक धान रोपाई की तुलना में कम पानी की खपत करती है और इसे जल संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प माना जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पंजाब अपने वार्षिक भूजल रिचार्ज की तुलना में 156.36 प्रतिशत तक पानी निकाल रहा है, जो गंभीर स्थिति को दर्शाता है। राज्य के कुल 153 प्रशासनिक ब्लॉकों में से 111 ब्लॉक ऐसे हैं जिन्हें “अत्यधिक दोहन” (over-exploited) श्रेणी में रखा गया है। इसका अर्थ यह है कि लगभग 72.5 प्रतिशत ब्लॉकों में भूजल का दोहन प्राकृतिक पुनर्भरण क्षमता से कहीं अधिक हो चुका है, जिससे भविष्य में जल संकट और गहरा सकता है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार ने खेती के तरीकों में बदलाव लाने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। चावल की सीधी बुवाई (DSR) को बढ़ावा देना इसी रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य धान की खेती में पानी की खपत को कम करना और भूजल स्तर को स्थिर करना है। इस तकनीक में खेतों में सीधे बीज बोए जाते हैं, जिससे रोपाई के लिए अधिक पानी की जरूरत नहीं पड़ती।

राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के फसल सीजन के लिए एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। इसके तहत पूरे पंजाब में पांच लाख एकड़ कृषि भूमि को DSR तकनीक के अंतर्गत लाने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि यदि यह लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया जाता है, तो राज्य में पानी की खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब में धान की पारंपरिक खेती लंबे समय से भूजल पर अत्यधिक निर्भर रही है, जिससे जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। यदि वैकल्पिक खेती तकनीकों को अपनाया जाए, तो इस संकट को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। DSR तकनीक को इसी दिशा में एक प्रभावी कदम माना जा रहा है।

सरकार द्वारा किसानों को इस तकनीक को अपनाने के लिए जागरूक किया जा रहा है और इसके लिए आवश्यक सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं पर भी काम किया जा रहा है। कृषि विभाग का मानना है कि यदि किसानों का सहयोग मिला तो आने वाले वर्षों में भूजल संकट को कम करने में मदद मिल सकती है।

पंजाब में बढ़ते भूजल संकट ने नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में DSR जैसी तकनीकों को अपनाना राज्य के लिए लंबे समय में जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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