पंजाब

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने 15वें राष्ट्रीय शिल्प मेले में कहा

SHIDDHANT
5 Dec 2025 8:45 PM IST
राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने 15वें राष्ट्रीय शिल्प मेले में कहा
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Punjab पंजाब: राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने शुक्रवार को 15वें राष्ट्रीय शिल्प मेले में शिरकत की और लोकतंत्र और जनता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने मेले में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत मतदाता ही है। राज्यपाल ने कहा, "अब तक जिसे सालों से राज भवन कहा जाता था, अब वह लोक भवन हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कर्त्तव्य पथ और ऐसे नाम देकर जनता को यह विश्वास दिलाया है कि सरकार आप ही हैं। हम सिर्फ आपके काम करने वाले लोग हैं। लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत मतदाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक और कलात्मक प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि ये जनता और सरकार के बीच संवाद का माध्यम भी हैं। राज्यपाल ने शिल्पकारों और कलाकारों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनका काम न केवल कला की उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन में भी योगदान देता है। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय शिल्प मेला भारत की विविधता, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने का एक महत्वपूर्ण मंच है। इस मेले के माध्यम से ग्रामीण और शहरी कलाकारों को अपने हुनर और उत्पादों को देश और विदेश में प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हमेशा यह रही है कि कलाकारों और शिल्पकारों को उनके काम का उचित मूल्य मिले और उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान मिले।

कार्यक्रम में राज्यपाल ने कई स्टालों का निरीक्षण किया और शिल्पकारों से उनके अनुभव और चुनौतियों के बारे में चर्चा की। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के आयोजनों के माध्यम से युवा पीढ़ी में शिल्पकला और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जागरूकता बढ़ती है। राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने अंत में सभी उपस्थित लोगों से अपील की कि वे लोकतंत्र की मूल भावना को समझें और अपने मताधिकार का प्रयोग करें। उन्होंने कहा कि केवल सरकार ही नहीं, बल्कि हर नागरिक का योगदान समाज और देश की प्रगति के लिए जरूरी है। इस अवसर पर राज्य के कई मंत्री, प्रशासनिक अधिकारी और शिल्पकार भी मौजूद थे। उन्होंने राज्यपाल की बातों की सराहना की और कहा कि इस प्रकार के आयोजन राज्य में सांस्कृतिक और कलात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।
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