
चंडीगढ़: कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने के मामले में हरियाणा सरकार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की उन अपीलों को खारिज कर दिया है, जिनमें एकल पीठ के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने के निर्देश दिए गए थे।
हाई कोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि जिन कर्मचारियों के पक्ष में आदेश दिया गया है, उनकी स्थिति पहले के वरुण गुप्ता मामले से अलग नहीं है। उस मामले में दिए गए फैसले को अंतिम रूप मिल चुका है। ऐसे में समान परिस्थितियों वाले कर्मचारियों को उसी आधार पर लाभ देने के एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीं बनता।
कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान देने का मामला
यह मामला हरियाणा सरकार के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ दिए जाने से जुड़ा हुआ था।
कर्मचारियों की ओर से मांग की गई थी कि उन्हें समान परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मचारियों की तरह न्यूनतम वेतनमान का लाभ दिया जाए। इस मामले में एकल पीठ ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था।
राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट की खंडपीठ में अपील दायर की थी।
वरुण गुप्ता मामले को बनाया गया आधार
एकल पीठ ने तीन जुलाई 2019 को दिए गए वरुण गुप्ता बनाम हरियाणा सरकार मामले के फैसले को आधार बनाते हुए वर्तमान याचिकाकर्ताओं को भी न्यूनतम वेतनमान का लाभ देने का आदेश दिया था।
इस फैसले में कर्मचारियों के अधिकारों और समान परिस्थितियों में समान लाभ के सिद्धांत पर विचार किया गया था।
राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ अपील करते हुए कहा था कि सभी मामलों को एक समान नहीं माना जा सकता। हालांकि, हाई कोर्ट की खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।
हाई कोर्ट ने कहा- समान परिस्थितियों में समान लाभ जरूरी
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि जिन कर्मचारियों को लाभ देने का आदेश दिया गया है, वे वरुण गुप्ता मामले के कर्मचारियों से अलग नहीं हैं।
अदालत ने कहा कि जब पहले मामले में फैसला अंतिम रूप ले चुका है और वर्तमान कर्मचारी भी उसी स्थिति में हैं, तो उन्हें उसी आधार पर लाभ देने के आदेश में हस्तक्षेप का कोई औचित्य नहीं है।
सरकार की अपीलें हुईं खारिज
हाई कोर्ट के फैसले के बाद हरियाणा सरकार की ओर से दायर अपीलों को खारिज कर दिया गया है।
इससे कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
कर्मचारियों में खुशी का माहौल
हाई कोर्ट के फैसले के बाद संबंधित कर्मचारियों में खुशी का माहौल है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे।
उनका मानना है कि अदालत के फैसले से उन्हें राहत मिली है और समान काम के आधार पर मिलने वाले लाभ की उम्मीद मजबूत हुई है।
वेतनमान से जुड़ा महत्वपूर्ण फैसला
न्यूनतम वेतनमान से जुड़े मामले कर्मचारियों के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर उनके वेतन और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है।
अदालतों में ऐसे मामलों में अक्सर यह देखा जाता है कि क्या कर्मचारी समान परिस्थितियों में कार्य कर रहे हैं और क्या उन्हें समान लाभ मिलना चाहिए।
आगे की प्रक्रिया पर नजर
हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब संबंधित विभागों को अदालत के आदेश के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
कर्मचारियों को लाभ देने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का यह फैसला न्यूनतम वेतनमान के लाभ की मांग कर रहे कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जब परिस्थितियां समान हों तो पहले से तय न्यायिक सिद्धांतों के आधार पर लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता।





