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Ludhiana.लुधियाना: गुरु अंगद देव वेट यूनिवर्सिटी में हाल ही में एक ग्लोबल स्टडी आयोजित की गई, जिसमें मुख्य फोकस था कि रेबीज जैसे संक्रामक रोगों के फैलने में शव निपटान साइटों की क्या भूमिका हो सकती है। इस अध्ययन में विशेषज्ञ, शोधकर्ता और छात्रों ने हिस्सा लिया।
अध्ययन के दौरान यह पाया गया कि अनियमित और असुरक्षित शव निपटान रेबीज और अन्य संक्रामक रोगों के फैलने का एक बड़ा कारण बन सकता है। विश्वविद्यालय ने छात्रों और शोधकर्ताओं को यह सिखाया कि सुरक्षित निपटान तकनीक, जैव-भौतिक नियंत्रण और निगरानी प्रणाली कैसे रोग नियंत्रण में मदद कर सकती हैं।
कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि यह अध्ययन न केवल स्थानीय बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनस्वास्थ्य और पशु स्वास्थ्य सुधार में योगदान कर सकता है। छात्रों को रोग नियंत्रण, जैव सुरक्षा और संक्रमण के रोकथाम के लिए उपयुक्त नीति और प्रोटोकॉल तैयार करने के लिए प्रशिक्षित किया गया।
ग्लोबल स्टडी में शामिल शोधकर्ताओं ने विभिन्न शव निपटान तरीकों की तुलना और उनके प्रभाव का भी विश्लेषण किया। उन्होंने यह सुझाव दिया कि संगठित और निगरानी वाली निपटान साइटें रेबीज और अन्य रोगों के फैलाव को काफी हद तक रोक सकती हैं।
विद्यार्थियों और विशेषज्ञों ने यह भी रेखांकित किया कि सार्वजनिक जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आवश्यक हैं ताकि स्थानीय समुदाय और पशुपालक सुरक्षित उपाय अपनाएँ। विश्वविद्यालय ने इस अध्ययन को भविष्य की नीति निर्माण और जोखिम प्रबंधन दिशा निर्देश के रूप में भी प्रस्तुत किया।
विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की ग्लोबल स्टडी पशु चिकित्सा और मानव स्वास्थ्य क्षेत्र के बीच पुल बनाने में मदद करती है। उन्होंने यह भी बताया कि उचित निपटान और निगरानी से न केवल रोग नियंत्रण संभव है, बल्कि सुरक्षित और स्थायी स्वास्थ्य ढांचे का निर्माण भी किया जा सकता है।
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