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मानसा, पंजाब। नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद पंजाब में राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है। इस बीच, एक पूर्व विधायक के बयान को लेकर खबरें सामने आई हैं, जिसमें झोटा के पिता, भीम सिंह के चुनाव लड़ने की संभावना और पूर्व विधायक द्वारा उन्हें समर्थन देने की पेशकश का जिक्र है। हालांकि, पूर्व विधायक के इस बयान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, भीम सिंह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनके परिवार का राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है। फिर भी, आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए, झोटा हत्याकांड पंजाब की राजनीति में एक अहम मुद्दा बन गया है।
परविंदर सिंह झोटा पंजाब के मानसा जिले में नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अपने अभियान के लिए जाने जाते थे। उन्होंने नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री और युवाओं के बीच बढ़ती नशाखोरी की समस्या के खिलाफ लगातार आवाज उठाई थी। उनके अभियान को स्थानीय समुदाय से काफी समर्थन मिला था। 13 अक्टूबर 2026 को, मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर हुई बहस के दौरान झोटा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना से इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। बाद में पुलिस ने इस मामले के आरोपी, मेडिकल स्टोर के मालिक अश्वनी कुमार को राजस्थान से गिरफ्तार कर लिया। इस घटना ने पंजाब में नशीले पदार्थों के कारोबार और इसके खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
15 अक्टूबर को दिए एक बयान में, झोटा के पिता भीम सिंह ने राजनीति में आने की संभावना को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उनका परिवार चुनावी राजनीति में हिस्सा नहीं लेगा, लेकिन वे नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के मुद्दे पर सरकार को जवाबदेह ठहराना जारी रखेंगे। भीम सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के कामकाज पर असंतोष जताया। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में नशीले पदार्थों की समस्या से निपटने के लिए सरकार पर्याप्त कदम उठाने में विफल रही है, और इस विफलता की भारी कीमत उनके बेटे को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आगामी विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी को जनता के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन था, न कि चुनाव परिणामों के बारे में कोई तय तथ्य। पूर्व विधायक के बयान ने चुनावी चर्चा में एक नया विषय जोड़ दिया है। चुनाव में झोटा के पिता का समर्थन करने के संबंध में पूर्व विधायक के कथित बयान ने इस मामले को एक नया राजनीतिक आयाम दिया है। यदि भीम सिंह भविष्य में चुनाव लड़ने का फैसला करते हैं, तो उन्हें राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से संभावित समर्थन के बारे में सवालों का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल, पुष्ट जानकारी के अनुसार, भीम सिंह ने न तो विधानसभा चुनाव लड़ने की कोई मंशा जताई है और न ही किसी राजनीतिक दल से जुड़ने की घोषणा की है। इसलिए, उनके चुनाव लड़ने की किसी भी चर्चा को फिलहाल केवल एक संभावना के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उनके बयानों का सटीक राजनीतिक महत्व तभी स्पष्ट होगा जब पूर्व विधायक की पहचान सामने आएगी और उनके बयान के पूरे संदर्भ को समझा जा सकेगा।
**हत्या के बाद पंजाब में विरोध-प्रदर्शन**
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद, मानसा सहित पंजाब के विभिन्न हिस्सों में विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए। उनके परिवार और समर्थकों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और हत्या की निष्पक्ष जांच की मांग की। इस दौरान, सामाजिक संगठनों, किसान यूनियनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने परिवार के प्रति अपना समर्थन जताया। भीम सिंह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के पुलिस महानिदेशक (DGP) के इस्तीफे की भी मांग की। परिवार का तर्क है कि नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। झोटा के समर्थकों ने इस मामले की CBI जांच की मांग करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया। परिवार ने यह रुख भी अपनाया था कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे अंतिम संस्कार नहीं करेंगे।
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