पंजाब

अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के आसपास धूमधाम से आतिशबाजी और उत्सव

SHIDDHANT
21 Oct 2025 9:27 PM IST
अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के आसपास धूमधाम से आतिशबाजी और उत्सव
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Punjab पंजाब: हर साल की तरह इस वर्ष भी बंदी छोड़ दिवस बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर के आसपास इस अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें श्रद्धालुओं ने भाग लिया और आसमान में शानदार आतिशबाजी का दृश्य देखने को मिला। बंदी छोड़ दिवस का पर्व हर साल सिख धर्म के इतिहास और वीरता की याद में मनाया जाता है। इस दिन गुरु अर्जुन देव जी और अन्य सिख शहीदों की याद में विशेष पूजा-अर्चना और प्रार्थनाएं की जाती हैं। स्वर्ण मंदिर के प्रांगण में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने गुरुद्वारे में माथा टेककर आशीर्वाद लिया और सिक्ख धर्म की परंपराओं के अनुसार सेवादारी में भाग लिया।
शाम होते ही मंदिर के आसपास आतिशबाजी का कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह नजारा भक्तों और स्थानीय लोगों के लिए अत्यंत आकर्षक रहा। रंग-बिरंगे पटाखों और रोशनी ने पूरा क्षेत्र जगमगा दिया। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए स्थानीय प्रशासन ने कड़े इंतजाम किए। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कई स्थानों पर चौकसी बढ़ाई। इस अवसर पर पंजाब के कई हिस्सों से लोग अमृतसर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने केवल आतिशबाजी का आनंद ही नहीं लिया, बल्कि गुरुद्वारे में लंगर का भी हिस्सा बने। लंगर में हजारों लोगों को भोजन परोसा गया। आयोजकों ने कहा कि बंदी छोड़ दिवस का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि धार्मिक और सामाजिक संदेश भी देना है।
स्थानीय प्रशासन ने बताया कि इस बार बंदी छोड़ दिवस पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। मंदिर के आसपास CCTV कैमरे लगाए गए और एंट्री पॉइंट्स पर जाँच की गई। पुलिस और स्वयंसेवकों की टीम ने सुनिश्चित किया कि श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो। विशेषज्ञों का कहना है कि बंदी छोड़ दिवस जैसे पर्वों के माध्यम से सिख धर्म और पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखा जाता है। इस दिन की प्रमुख गतिविधियों में पूजा-अर्चना, कीर्तन, लंगर सेवा, और रात में आतिशबाजी प्रमुख हैं। सभी श्रद्धालु इस दिन विशेष श्रद्धा और उत्साह के साथ हिस्सा लेते हैं।
धार्मिक नेताओं ने भी उपस्थित लोगों को संबोधित किया और बंदी छोड़ दिवस के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि यह पर्व केवल उत्सव का नहीं, बल्कि वीरता, बलिदान और समाज सेवा का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से शांति और भाईचारे के साथ पर्व मनाने का संदेश दिया। इस वर्ष के आयोजन में स्वर्ण मंदिर के चारों ओर विशेष सजावट और रोशनी की गई। रात को मंदिर और आसपास का क्षेत्र रोशनी और पटाखों की चमक से जगमगाता रहा। श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।
अमृतसर प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया कि आयोजनों के दौरान स्वच्छता और स्वास्थ्य मानकों का पालन हो। आयोजकों ने कहा कि आने वाले वर्षों में भी बंदी छोड़ दिवस इसी तरह हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। इस प्रकार, अमृतसर में बंदी छोड़ दिवस के मौके पर धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्सव का अनूठा संगम देखने को मिला। भक्तों ने दिनभर की पूजा, कीर्तन और लंगर सेवा के बाद रात को आतिशबाजी का आनंद लिया और इस पर्व को यादगार बनाया।
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