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राधा अष्टमी पर मंदिरों में गूंजा ‘राधे-राधे’
अमृतसर : राधा अष्टमी के पावन अवसर पर अमृतसर के विभिन्न मंदिरों में शनिवार को भक्ति और उल्लास का माहौल देखने को मिला। सुबह से ही श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर राधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए। मंदिर परिसर ‘राधे-राधे’ और ‘राधे कृष्ण’ के जयकारों से गूंज उठे। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
राधा अष्टमी को राधा रानी के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा रानी की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। पर्व को लेकर अमृतसर के मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। कई मंदिरों में राधा-कृष्ण का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। सुबह मंदिरों के कपाट खुलने के साथ ही भक्तों की आवाजाही शुरू हो गई। श्रद्धालुओं ने कतारों में लगकर दर्शन किए और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं को राधा रानी के श्री चरणों के विशेष दर्शन भी कराए गए। दर्शन के दौरान भक्त भाव-विभोर नजर आए।
मंदिरों में भजन मंडलियों ने राधा-कृष्ण की महिमा का गुणगान किया। ‘राधे-राधे’ के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। महिलाओं और बच्चों ने भी धार्मिक कार्यक्रमों में उत्साह के साथ हिस्सा लिया। कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर राधा रानी की पूजा की। राधा अष्टमी के अवसर पर मंदिरों में विशेष आरती का आयोजन भी किया गया। भगवान को विभिन्न प्रकार के व्यंजनों और मिठाइयों का भोग लगाया गया। पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। कुछ स्थानों पर भंडारे और धार्मिक सत्संग भी आयोजित किए गए।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राधा रानी प्रेम और भक्ति की प्रतीक मानी जाती हैं। भगवान श्रीकृष्ण और राधा का प्रेम आध्यात्मिक भक्ति के सर्वोच्च स्वरूप के रूप में देखा जाता है। यही वजह है कि राधा अष्टमी पर श्रद्धालु विशेष रूप से राधा-कृष्ण की संयुक्त आराधना करते हैं। दिनभर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। परिवार के साथ पहुंचे भक्तों ने राधा रानी का आशीर्वाद लिया और पूजा-अर्चना की। शाम के समय विशेष आरती और भजन-कीर्तन के साथ उत्सव की रौनक और बढ़ गई। राधा अष्टमी के इस अवसर पर अमृतसर में चारों ओर श्रद्धा, भक्ति और ‘राधे-राधे’ के जयकारों की गूंज सुनाई दी।
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