पंजाब
पंजाब चुनाव से पहले अकाली दल को किसान संगठन का साथ, बीकेयू कादियान ने किया समर्थन
Ratna Netam
2 Nov 2026 3:19 PM IST

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चंडीगढ़। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इसी बीच शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) को किसान संगठन भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) कादियान का समर्थन मिलने से पार्टी को नई ताकत मिली है। अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने किसान संगठन के इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे पार्टी के लिए बड़ा प्रोत्साहन बताया है। बीकेयू कादियान के अध्यक्ष हरमीत सिंह कादियान और उनकी टीम ने आगामी विधानसभा चुनाव में अकाली दल को समर्थन देने का भरोसा दिलाया है। इस घटनाक्रम को पंजाब की चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजनीतिक दल अपने संगठन को मजबूत करने और अलग-अलग वर्गों का समर्थन हासिल करने में जुटे हैं। ऐसे समय में किसान संगठन का अकाली दल के पक्ष में खड़ा होना पार्टी के लिए अहम घटनाक्रम है। पंजाब की राजनीति में किसानों की भूमिका हमेशा से महत्वपूर्ण रही है। कृषि प्रधान राज्य होने के कारण यहां किसान संगठनों का प्रभाव केवल खेती-किसानी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं।
हरमीत सिंह कादियान ने टीम के साथ दिया समर्थन
अकाली दल की ओर से साझा किए गए बयान के मुताबिक, बीकेयू कादियान के अध्यक्ष एस. हरमीत सिंह कादियान और उनकी पूरी टीम ने आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को बिना शर्त समर्थन देने का आश्वासन दिया है। पार्टी ने किसान नेता और संगठन के सदस्यों के इस फैसले के लिए आभार व्यक्त किया है। सुखबीर बादल ने इस समर्थन को पार्टी के लिए उत्साह बढ़ाने वाला कदम बताया।अकाली दल का मानना है कि किसान संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय लोगों का साथ मिलने से पार्टी की जमीनी पकड़ मजबूत होगी। चुनाव के दौरान गांवों और कृषि प्रधान क्षेत्रों में किसानों की राय और स्थानीय मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में बीकेयू कादियान का समर्थन अकाली दल के लिए राजनीतिक रूप से उपयोगी साबित हो सकता है।
किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर फोकस
अकाली दल ने इस समर्थन के बाद किसानों और खेत मजदूरों से जुड़े मुद्दों को अपनी राजनीतिक रणनीति का प्रमुख हिस्सा बनाने के संकेत दिए हैं। पार्टी की ओर से कहा गया है कि पंजाब में खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए ठोस नीतियां लागू करने की जरूरत है। इसके साथ ही किसानों और खेत मजदूरों की लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान करने की प्रतिबद्धता भी जताई गई है।अकाली दल ने दूसरे किसान और मजदूर संगठनों से भी पार्टी को मजबूत करने की अपील की है। पार्टी का कहना है कि कृषि क्षेत्र को आर्थिक रूप से सशक्त बनाए बिना पंजाब की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत नहीं किया जा सकता। किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य, खेती की लागत में कमी, सिंचाई की बेहतर सुविधाएं और कृषि आधारित रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। हालांकि, इन मुद्दों पर पार्टी की ओर से विस्तृत चुनावी योजना सामने आना अभी बाकी है।
पंजाब की राजनीति में किसानों की भूमिका अहम
पंजाब में किसान आंदोलन और कृषि से जुड़े मुद्दे लंबे समय से राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रहे हैं। राज्य में बड़ी आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ऐसे में किसान संगठनों का समर्थन किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। किसान संगठनों की ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदगी और उनके कार्यकर्ताओं का नेटवर्क चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों को जनसंपर्क में मदद कर सकता है।बीकेयू कादियान का समर्थन मिलने से अकाली दल को ग्रामीण मतदाताओं के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने का अवसर मिल सकता है। खासकर उन क्षेत्रों में इस समर्थन का राजनीतिक महत्व बढ़ सकता है, जहां खेती और किसान हित स्थानीय चुनावी मुद्दों को प्रभावित करते हैं। हालांकि, किसी संगठन का समर्थन मिलने का अर्थ यह नहीं है कि उसके सभी सदस्य या उससे जुड़े सभी किसान किसी एक दल को ही वोट देंगे। चुनाव में मतदाताओं का अंतिम फैसला स्थानीय परिस्थितियों, उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों के प्रदर्शन पर भी निर्भर करेगा।
2020 में भाजपा से अलग हुआ था अकाली दल
पंजाब की राजनीति में अकाली दल के लिए किसानों का मुद्दा इसलिए भी संवेदनशील रहा है क्योंकि वर्ष 2020 में केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को लेकर पार्टी ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अपना गठबंधन तोड़ लिया था। उस समय किसान संगठनों का विरोध और कृषि कानूनों को लेकर पंजाब में व्यापक आंदोलन चल रहा था। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति को काफी प्रभावित किया था।अब आगामी विधानसभा चुनाव से पहले बीकेयू कादियान का समर्थन अकाली दल के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम बनकर सामने आया है। इससे पार्टी किसानों के बीच अपनी पुरानी राजनीतिक पकड़ को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर सकती है।
गठबंधन की चर्चाओं के बीच बढ़ी राजनीतिक हलचल
पंजाब में आगामी चुनाव को लेकर अकाली दल और भाजपा के संभावित गठबंधन की चर्चाएं भी चल रही हैं। सुखबीर सिंह बादल ने हालिया बातचीत में किसी संभावित गठबंधन के बारे में स्पष्ट समयसीमा बताने से इनकार किया है। उन्होंने संकेत दिया कि इस संबंध में स्थिति आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकती है। दूसरी तरफ भाजपा के नेताओं के बयानों से भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा मिली है। हालांकि, अभी किसी औपचारिक गठबंधन की पुष्टि नहीं हुई है।इस पूरे घटनाक्रम के बीच बीकेयू कादियान का अकाली दल को समर्थन मिलना पार्टी के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। सुखबीर बादल इसे किसानों के बीच पार्टी के प्रति भरोसे के तौर पर पेश कर सकते हैं। वहीं, चुनाव के नजदीक आने के साथ अन्य किसान संगठनों और ग्रामीण क्षेत्रों के प्रभावशाली समूहों का रुख भी महत्वपूर्ण होगा।फिलहाल अकाली दल के सामने इस समर्थन को चुनावी मजबूती में बदलने की चुनौती है। पार्टी को किसानों के सामने कृषि से जुड़े मुद्दों पर अपनी स्पष्ट नीतियां और समाधान रखने होंगे। केवल समर्थन मिलने से चुनावी सफलता सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि मतदाताओं का विश्वास हासिल करना भी जरूरी होगा। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सुखबीर बादल इस राजनीतिक समर्थन को पंजाब में अकाली दल की वापसी के अभियान में किस तरह इस्तेमाल करते हैं।
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