पंजाब

बरनाला के किसानों ने बदली खेती की तस्वीर पराली से दूरी

Kiran
21 Sept 2026 11:31 AM IST
बरनाला के किसानों ने बदली खेती की तस्वीर पराली से दूरी
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Barnala बरनाला ज़िले के कोठे सुरजीतपुरा गाँव के किसान भाइयों तरसेम सिंह जवंधा और सुखपाल सिंह जवंधा के लिए, पराली न जलाने से उन्हें फ़सलों में विविधता लाने और अपनी खेती से होने वाली आय बढ़ाने में मदद मिली है। तरसेम (46) और सुखपाल (43) ने बताया कि उन्होंने न केवल धान की पराली को बिना जलाए उसका प्रबंधन किया, बल्कि मल्चिंग और पराली प्रबंधन के अन्य तरीकों को अपनाकर आलू की पैदावार में भी बढ़ोतरी देखी है।
वे धान की कटाई के बाद लगभग 80 से 85 एकड़ में आलू और लगभग 20 एकड़ में गेहूँ की खेती करते हैं। आलू की कटाई के बाद, वे लगभग 40 एकड़ में मक्का बोते हैं। वे मूंग और तरबूज़ भी उगाते हैं, जिससे वे साल में तीन फ़सलें ले पाते हैं और फ़सलों में विविधता को बढ़ावा देते हैं। सुखपाल ने बताया कि 2024 से पहले, वे धान की पराली के गट्ठर (बेल्स) बनाते थे, लेकिन अब वे मल्चिंग का तरीका अपना रहे हैं। उनके अनुसार, इस बदलाव से उनके आलू के उत्पादन को भी फ़ायदा हुआ है।
आलू की उनकी पैदावार, जो पहले प्रति एकड़ लगभग 250 से 300 बोरी (हर बोरी का वज़न 50 किलोग्राम) होती थी, अब बढ़कर प्रति एकड़ लगभग 350 बोरी हो गई है। किसानों को सरकारी सब्सिडी योजना के तहत एक 'सुपर सीडर' मिला, जबकि उन्होंने 2024 में खुद एक 'एमबी प्लाऊ' (MB plough) और 'रोटावेटर' खरीदा। वे गेहूँ की बुआई के लिए सुपर सीडर का इस्तेमाल करते हैं।
सुखपाल सिंह ने कहा, "हमें पराली के प्रबंधन में कभी कोई मुश्किल नहीं आई। बल्कि, फ़सल के उत्पादन और मुनाफ़े में बढ़ोतरी हुई है।" उन्होंने बताया कि इन भाइयों के पास अपनी लगभग 21 एकड़ ज़मीन है, जबकि बाकी ज़मीन पर वे लीज़ (पट्टे) पर खेती करते हैं। खेती का खर्च निकालने के बाद, वे हर साल प्रति एकड़ लगभग 40,000 रुपये की बचत करते हैं।
ये किसान हल्दीराम और अन्य फ़ूड-प्रोसेसिंग कंपनियों को भी आलू की सप्लाई करते हैं। सुखपाल सिंह ने कहा कि उन्हें अपनी उपज की मार्केटिंग में कोई मुश्किल नहीं हुई और उन्हें अच्छे दाम मिले। उन्होंने कहा कि इस साल धान की पराली की अच्छी मांग थी और ज़िले में बड़ी संख्या में बेलर (पराली के गट्ठर बनाने वाली मशीनें) उपलब्ध थे। किसानों से पराली न जलाने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद फ़ायदेमंद कीड़े नष्ट हो जाते हैं और इसका बुरा असर इंसानों की सेहत, जानवरों और पर्यावरण पर पड़ता है। बरनाला के डिप्टी कमिश्नर हरप्रीत सिंह ने पराली प्रबंधन के टिकाऊ तरीकों को अपनाने और साथ ही फ़सलों में विविधता को बढ़ावा देने के लिए इन किसान भाइयों की तारीफ़ की।
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