
पटियाला। पंजाब-हरियाणा सीमा पर खनौरी में अपनी मांगों को लेकर डटे किसानों ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ बैठक का लिखित आश्वासन मिलने के बाद फिलहाल अपना दिल्ली कूच कार्यक्रम स्थगित कर दिया है। किसान 16 अगस्त से पैदल दिल्ली जाने के लिए खनौरी सीमा पर जुटे हुए थे।
संयुक्त किसान मोर्चा गैर राजनीतिक के नेतृत्व में 51 किसान पैदल मार्च के लिए यहां पहुंचे थे। किसानों का उद्देश्य अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाना था। हालांकि, बुधवार को हरियाणा प्रशासन के अधिकारियों के पहुंचने और वार्ता का प्रस्ताव मिलने के बाद किसानों ने अपने कार्यक्रम को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला लिया।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि बुधवार को हरियाणा प्रशासन के अधिकारी खनौरी सीमा पर पहुंचे थे। अधिकारियों ने किसानों को जानकारी दी कि चार सितंबर को केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ उनकी बैठक कराई जाएगी। इसके लिए प्रशासन की ओर से लिखित पत्र भी दिया गया है।
उन्होंने बताया कि बैठक के आश्वासन के बाद बुधवार को प्रस्तावित सभी कार्यक्रमों को स्थगित कर दिया गया है। किसान नेताओं का कहना है कि अब वे चार सितंबर को होने वाली बैठक में अपनी मांगों और समस्याओं को केंद्र सरकार के सामने रखेंगे।
किसानों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उनका उद्देश्य सरकार के सामने किसानों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना है। किसान नेताओं ने कहा कि बातचीत के माध्यम से समाधान निकलता है तो यह सकारात्मक कदम होगा।
खनौरी सीमा पर पिछले कई दिनों से किसान जुटे हुए थे। पैदल दिल्ली कूच के ऐलान के बाद प्रशासन भी सतर्क था और सीमा क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई थी। किसानों और प्रशासन के बीच लगातार बातचीत का दौर भी चल रहा था।
बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियों की पहल के बाद आंदोलन को लेकर स्थिति में बदलाव आया है। किसान नेताओं ने कहा कि वे सरकार के साथ होने वाली बैठक का इंतजार करेंगे और उसके बाद आगे की रणनीति तय करेंगे।
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत से होना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि चार सितंबर को होने वाली बैठक में सरकार किसानों के मुद्दों को गंभीरता से सुनेगी।
वहीं, प्रशासन की ओर से किसानों को शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि किसानों और सरकार के बीच संवाद बनाए रखना जरूरी है।
किसान आंदोलन के दौरान कई बार केंद्र और किसान संगठनों के बीच बातचीत हुई है। किसान संगठन अपनी मांगों को लेकर सरकार से ठोस आश्वासन की मांग करते रहे हैं। इसी कड़ी में अब चार सितंबर की बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों और व्यापारियों का कहना है कि लंबे समय तक सीमा पर आंदोलन और यातायात प्रभावित होने से आम लोगों को भी परेशानी होती है। ऐसे में बातचीत के जरिए समाधान निकलना सभी के हित में होगा।
फिलहाल किसान खनौरी सीमा पर मौजूद हैं, लेकिन उन्होंने पैदल दिल्ली कूच समेत अन्य कार्यक्रमों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। अब सभी की नजर चार सितंबर को होने वाली बैठक पर है।
किसान नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि बैठक में उनकी मांगों पर सकारात्मक चर्चा होती है तो आगे की स्थिति उसी के आधार पर तय की जाएगी। वहीं, किसानों ने अपने समर्थकों से भी शांति बनाए रखने की अपील की है।





