
मोहाली। संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर लगाया गया धरना शनिवार को छठे दिन भी जारी रहा। किसानों ने 1 सितंबर से 7 सितंबर तक मोहाली से चंडीगढ़ जाने वाली मुख्य सड़क की एक साइड पर मोर्चा लगाने का ऐलान किया था। प्रदर्शन के दौरान किसान अपनी मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं।
किसान नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन शुरू होने के छह दिन बाद भी सरकार की ओर से उनसे किसी तरह की सीधी बातचीत नहीं की गई है। इसे लेकर किसान नेताओं में नाराजगी बढ़ रही है। उनका कहना है कि सरकार किसानों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है।
प्रशासन ने बातचीत की कोशिश की
किसानों और सरकार के बीच तालमेल बनाने के प्रयास के तहत चंडीगढ़ की एसएसपी और रोपड़ रेंज के डीआईजी नानक सिंह ने किसान नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक के बाद प्रशासन ने शुक्रवार को एक दिन का समय मांगा था।
हालांकि, किसान नेताओं का कहना है कि अब तक उनकी मांगों को लेकर सरकार की तरफ से कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर बातचीत और समाधान की दिशा में कदम नहीं उठाया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कई मांगों को लेकर डटे किसान
संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी मांगों की लंबी सूची प्रशासन और सरकार के सामने रखी है। किसानों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और सरकार को इन पर तत्काल निर्णय लेना चाहिए।
किसानों की प्रमुख मांगों में अमेरिका के साथ ट्रेड डील नहीं करने की मांग, पानी से जुड़े मुद्दों को लेकर सेक्शन 78, 79 और 80 को रद्द करना शामिल है। इसके अलावा किसान पूरी तरह से कर्ज माफी की मांग भी कर रहे हैं।
स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार फसल कीमत की मांग
किसान नेताओं ने फसलों के दाम स्वामीनाथन रिपोर्ट के अनुसार तय करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि किसानों को उनकी मेहनत और लागत के हिसाब से उचित मूल्य मिलना चाहिए।
इसके अलावा बिजली बिल 2025 और बीज बिल 2025 को वापस लेने, गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और लैंड पुलिंग स्कीम को रद्द करने जैसी मांगें भी आंदोलन का हिस्सा हैं।
सड़क पर जारी है किसानों का मोर्चा
किसानों ने मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर सड़क की एक साइड पर अपना मोर्चा लगाया हुआ है। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद हैं। किसान नेताओं का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचा रहे हैं।
प्रशासन की ओर से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। यातायात व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
किसानों ने सरकार से मांगा जवाब
प्रदर्शनकारी किसान नेताओं का कहना है कि सरकार को किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल बैठकें करने से समस्या का हल नहीं निकलेगा, बल्कि मांगों पर ठोस फैसला लेना होगा।
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द बातचीत शुरू नहीं करती और मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती तो आंदोलन को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
आंदोलन को लेकर प्रशासन अलर्ट
मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर किसानों के जमावड़े को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।
प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत के प्रयास जारी हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार की ओर से किसानों के साथ औपचारिक बातचीत कब शुरू होती है और आंदोलन को लेकर आगे क्या रणनीति बनती है।
फिलहाल संयुक्त किसान मोर्चा का धरना छठे दिन भी जारी है। किसानों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे।





