पंजाब

पंजाब में मैनुअल तराजू से किसानों को नुकसान, उठे सवाल

Kiran
23 Oct 2026 9:12 AM IST
पंजाब में मैनुअल तराजू से किसानों को नुकसान, उठे सवाल
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पंजाब भर के किसानों ने अनाज मंडियों में अभी भी हाथ से तौलने वाली मशीनों (मैनुअल तराजू) के इस्तेमाल पर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि गलत तौल के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने मांग की है कि अनाज की खरीद के लिए डिजिटल तौल मशीनों का इस्तेमाल किया जाए। किसानों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों द्वारा डिजिटल तौल मशीनें अपनाने के बार-बार निर्देश दिए जाने के बावजूद, मंडियों में अभी भी पुराने तरीके के तराजू ही बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे हैं।
किसानों के अनुसार, हाथ से तौलने वाली मशीनों में आसानी से हेरफेर की जा सकती है, जिससे उनकी उपज के दर्ज वजन में गड़बड़ी हो जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अक्सर बेची गई उपज की सही मात्रा के हिसाब से पूरा भुगतान नहीं मिलता है। लुधियाना के एक किसान तरसेम सिंह ने कहा, "हाथ से तौलने वाली मशीनों में आसानी से हेरफेर की जा सकती है, जिससे उपज के वजन में अक्सर गड़बड़ी होती है। अगर उपज को हाथ से तौलने वाली मशीनों से तौला जाए, तो इसमें कोई पारदर्शिता नहीं रहती।"
एक अन्य किसान, गुरबख्शीश सिंह ने बताया कि वे कई सालों से यह मुद्दा उठाते आ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि डिजिटल तौल मशीनें अपनाने के निर्देश होने के बावजूद, आढ़ती (कमीशन एजेंट) अभी भी पुराने तराजू का ही इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे किसानों को नुकसान हो रहा है। वहीं, आढ़तियों का कहना है कि कई अनाज मंडियों में डिजिटल मशीनें चलाने के लिए बिजली के उचित पॉइंट नहीं हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कई मंडियों में जमीन समतल नहीं है, जिस वजह से वहां डिजिटल तौल मशीनों को सही ढंग से लगाना और चलाना मुश्किल हो जाता है।
एक आढ़ती, दविंदर सिंह ने कहा, "जब तक बुनियादी ढांचे से जुड़ी समस्याओं को हल नहीं किया जाता, तब तक इलेक्ट्रॉनिक तौल प्रणाली को अपनाना एक चुनौती बनी रहेगी।" लुधियाना जिला मंडी अधिकारी गुरमतपाल सिंह ने बताया कि आढ़तियों को डिजिटल तौल मशीनों के इस्तेमाल के बारे में पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं। हालांकि, आढ़ती अभी भी इन्हें अपनाने में व्यावहारिक कठिनाइयों और अन्य चिंताओं का हवाला दे रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर किसी किसान को अपनी उपज के वजन को लेकर कोई संदेह है, तो वह मंडी बोर्ड से संपर्क कर सकता है और हर मंडी में मौजूद डिजिटल तौल मशीन पर अपनी उपज को दोबारा तौलवा सकता है।"
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