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Bathinda मानसा में तनाव का माहौल रहा। एक दिन पहले पुलिस ने जबरन सीमांत किसान दलजीत सिंह के शव को अपने कब्जे में लेकर उसे एम्स, बठिंडा भेज दिया था। इस बीच, दलजीत और मारे गए नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा के परिजन अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखे हुए हैं। पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं - एक हत्या के मामले में और दूसरी पुलिस टीम पर हुए हमले के संबंध में (हत्या के प्रयास की धारा के तहत)। इसके अलावा, दलजीत की मौत (जिसके पीछे ड्रग ओवरडोज़ का संदेह है) के मामले में तीन गिरफ्तारियां की गई हैं। बुधवार को तीन डॉक्टरों के एक बोर्ड ने शव का पोस्टमार्टम किया, लेकिन शव को अभी भी एम्स में ही रखा गया है।
प्रदर्शनकारियों ने मानसा में डिप्टी कमिश्नर (DC) के आवास का घेराव किया और मंगलवार को हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने की मांग की। बरनाला-सिरसा रोड पर तिनकोनी के पास का जो हिस्सा मंगलवार सुबह यातायात के लिए खोला गया था, उसे फिर से बंद कर दिया गया। वहीं, भारतीय किसान यूनियन ने 40 पुलिस थानों के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। मुख्य सड़कों पर भारी पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेड्स और ट्रकों व ट्रॉलियों की मौजूदगी के कारण प्रदर्शनकारी विरोध स्थल तक नहीं पहुंच सके। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग ने भी मुख्य सचिव, मानसा के DC और SSP से एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और जेल में बंद खडूर साहिब के सांसद अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। चन्नी ने कहा, "दलजीत के परिवार ने मुझे बताया कि पुलिस आधी रात को उनके घर पहुंची और उनकी पत्नी से पोस्टमार्टम के लिए सहमति मांगी। क्या यही कानून का राज है? भगवंत मान मंच तो संभाल सकते हैं, लेकिन राज्य नहीं।"
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि हत्या की FIR दलजीत के पिता जरनैल सिंह के बयान पर दर्ज की गई है, जिसमें उन्होंने तीन लोगों के नाम बताए थे। उन्होंने कहा, "तीनों को गिरफ्तार कर लिया गया है।" SSP वैभव चौधरी ने बताया कि दलजीत की मौत और पुलिस पर हुए हमले के मामले में अलग-अलग FIR दर्ज की गई हैं।
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