पंजाब

Nawanshahr में पर्यावरण जागरूकता, परागपुर में शिविर आयोजित

Ratna Netam
25 April 2026 5:38 PM IST
Nawanshahr में पर्यावरण जागरूकता, परागपुर में शिविर आयोजित
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Jalandhar.जालंधर: परागपुर में हाल ही में किसानों और स्थानीय समुदाय के लिए मिट्टी संरक्षण और कृषि अवशेष प्रबंधन पर एक विशेष जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य किसानों को कृषि में सतत और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों के बारे में शिक्षित करना था।
शिविर में कृषि विशेषज्ञों और पर्यावरण विज्ञानियों ने भाग लिया। उन्होंने मिट्टी की गुणवत्ता, उपज बढ़ाने के तरीके और कृषि अवशेषों के सही प्रबंधन के महत्व पर विस्तृत जानकारी साझा की। किसानों को बताया गया कि किस तरह से खेतों में बची हुई फसल अवशेषों को जलाने के बजाय जैविक खाद और कम्पोस्ट में परिवर्तित किया जा सकता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और प्रदूषण कम होता है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से किसानों को यह बताया गया कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए मिट्टी संरक्षण अनिवार्य है। मिट्टी की कटाव रोकने, जल संरक्षण और जैव विविधता को बनाए रखने के लिए उन्हें व्यावहारिक सुझाव दिए गए। इसके साथ ही, उन्होंने किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों जैसे स्ट्रॉ रोटेशन, ग्रीन मैन्युरिंग और एरोबिक कम्पोस्टिंग के तरीकों से अवगत कराया।
जागरूकता शिविर में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि कृषि अवशेष जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है बल्कि किसानों के लिए भी लंबे समय में हानिकारक साबित हो सकता है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन के सहयोग से किसानों को प्रशिक्षण और आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया।
किसानों ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह उन्हें नई तकनीकों को अपनाने और खेती में उत्पादकता बढ़ाने का मार्ग दिखाता है। उन्होंने कहा कि अब वे अवशेषों को जलाने के बजाय सही तरीके से प्रबंधित करेंगे, जिससे खेतों की मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होगा और पर्यावरण की रक्षा भी होगी।
शिविर में उपस्थित पर्यावरण विशेषज्ञों ने कहा कि मिट्टी संरक्षण और कृषि अवशेष प्रबंधन सिर्फ एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह सतत विकास और कृषि की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने का तरीका है। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए यह कदम आर्थिक रूप से भी लाभकारी है, क्योंकि इससे उर्वरक पर खर्च कम होता है और उपज बढ़ती है।
कार्यक्रम का समापन अधिकारियों द्वारा किसानों को प्रशिक्षण सामग्री और प्रदर्शनी के माध्यम से कृषि उपकरण दिखाने के साथ किया गया। किसानों को आश्वासन दिया गया कि भविष्य में इस प्रकार के और भी प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे, ताकि ग्रामीण और कृषि समुदाय सतत और पर्यावरण-अनुकूल खेती की ओर आगे बढ़ सकें।
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