पंजाब

DSP अमरोज मामला: कोर्ट ने CBI को लगाई फटकार, कहा- अधिकारी पर मुकदमे की अनुमति देना सरकार का क्षेत्राधिकार

Saba Naaz
24 July 2026 7:37 PM IST
DSP अमरोज मामला: कोर्ट ने CBI को लगाई फटकार, कहा- अधिकारी पर मुकदमे की अनुमति देना सरकार का क्षेत्राधिकार
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चंडीगढ़: 50 लाख रुपये की कथित रिश्वत मांगने के बहुचर्चित मामले में आरोपित पंजाब पुलिस के निलंबित डीएसपी अमरोज सिंह को सीबीआई की विशेष अदालत से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की उस अर्जी को सीधे तौर पर खारिज कर दिया है, जिसमें पंजाब सरकार को डीएसपी अमरोज के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति (Prosecution Sanction) पर जल्द से जल्द फैसला लेने के निर्देश देने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देना या न देना पूरी तरह से सरकार का विशेषाधिकार है और न्यायालय इस प्रशासनिक फैसले में कोई दखल नहीं दे सकता।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला अप्रैल 2021 का है, जब अंबाला की एक फैंटेसी गेमिंग टेक्नोलॉजी कंपनी के निदेशक मोहित शर्मा ने सीबीआई में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि जीरकपुर पुलिस ने एक मामले में मोहित के बैंक खाते फ्रीज कर दिए थे। इसके बाद उन पर से कार्रवाई का डर दिखाकर और राहत देने की एवज में कथित तौर पर 50 लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी गई थी। शिकायत मिलने पर सीबीआई ने जाल बिछाकर जींद निवासी अनिल मोर को 10 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

जांच का दायरा आगे बढ़ने पर कैथल निवासी दिलबाग सिंह समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए, जो कथित रूप से डीएसपी अमरोज सिंह के इशारे और उनके नाम पर वसूली कर रहे थे। इसके आधार पर सीबीआई ने तत्कालीन जीरकपुर डीएसपी अमरोज सिंह और उनके रीडर मंदीप सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया था।

सीबीआई और बचाव पक्ष के बीच क्या थीं दलीलें?

अदालत में सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से पक्ष रखा गया कि उन्होंने 31 दिसंबर 2022 को ही डीएसपी अमरोज सिंह और उनके रीडर के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति हेतु पूरा रिकॉर्ड पंजाब सरकार को भेज दिया था। रीडर मंदीप सिंह के मामले में तो सरकार की तरफ से मंजूरी मिल गई, लेकिन डीएसपी अमरोज सिंह के मामले में तीन साल से अधिक का लंबा समय बीत जाने के बावजूद सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है। इसी देरी का हवाला देते हुए सीबीआई ने अदालत से गुहार लगाई थी कि वह सरकार को एक तय समय सीमा में इस पर फैसला लेने का निर्देश दे।

दूसरी ओर, डीएसपी अमरोज सिंह के बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि अभियोजन स्वीकृति देना पूरी तरह से सरकार का आंतरिक क्षेत्राधिकार है। उन्होंने यह दावा भी किया कि सरकार इस मामले में पहले ही मंजूरी देने से इनकार कर चुकी है और सीबीआई ने अपनी अर्जी में कई महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सीबीआई कोर्ट ने साफ कर दिया कि अभियोजन स्वीकृति देना सरकार का पूर्ण अधिकार है, और सरकार इसे स्वीकार या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र है। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल डीएसपी अमरोज के मामले में कानूनी प्रक्रिया एक नए मोड़ पर आ गई है।

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