
Punjab पंजाब में कुत्तों का बढ़ता आतंक, दोआबा क्षेत्र में 6 महीने में 30 हजार से ज्यादा काटने के मामले
चंडीगढ़। पंजाब के दोआबा क्षेत्र में आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले छह महीनों में कुत्तों के काटने के करीब 30 हजार मामले सामने आने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। लगातार बढ़ रहे इन मामलों ने आवारा कुत्तों की समस्या और उनके नियंत्रण के लिए किए जा रहे उपायों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दोआबा क्षेत्र के कई जिलों में कुत्तों के काटने के मामलों में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में रोजाना बड़ी संख्या में लोग एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे हैं। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की संख्या भी काफी अधिक बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, खुले में फेंका जा रहा कचरा और प्रभावी नसबंदी कार्यक्रमों की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। शहरों और गांवों में कचरा प्रबंधन की कमजोर व्यवस्था के कारण कुत्तों को आसानी से भोजन मिल जाता है, जिससे उनकी संख्या बढ़ रही है। कुत्तों के काटने के बाद सबसे बड़ा खतरा रेबीज बीमारी का होता है। समय पर इलाज और एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग लोगों को सलाह दे रहा है कि कुत्ते के काटने की स्थिति में तुरंत घाव को साफ पानी और साबुन से धोएं और नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर वैक्सीन जरूर लगवाएं।
प्रशासन की ओर से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अभियान और टीकाकरण जैसी योजनाएं चलाई जा रही हैं, लेकिन जमीन पर इनकी प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कई स्थानों पर नसबंदी अभियान की धीमी गति और निगरानी की कमी के कारण अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंड सड़कों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर घूमते रहते हैं। इससे बच्चों का घर से बाहर निकलना और लोगों का सुबह-शाम घूमना मुश्किल हो गया है। कई बार कुत्तों के हमले में लोग गंभीर रूप से घायल भी हो चुके हैं।
नगर निकायों के सामने भी यह समस्या बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल कुत्तों को पकड़ने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए वैज्ञानिक तरीके से नसबंदी, टीकाकरण, कचरा प्रबंधन में सुधार और लोगों में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। सरकार और प्रशासन को इस समस्या से निपटने के लिए लंबी अवधि की योजना तैयार करनी होगी। प्रभावी निगरानी, नियमित नसबंदी अभियान और रेबीज नियंत्रण कार्यक्रमों को मजबूत करके ही कुत्तों के बढ़ते हमलों पर रोक लगाई जा सकती है। पंजाब के दोआबा क्षेत्र में सामने आए आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि आवारा कुत्तों की समस्या अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बन चुकी है। समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले समय में यह संकट और बढ़ सकता है।





