पंजाब

सज्जन कुमार को लेकर कथित बयान पर धालीवाल का हमला, हुड्डा के खिलाफ कार्रवाई की मांग

Kavita2
22 Aug 2026 1:48 PM IST
सज्जन कुमार को लेकर कथित बयान पर धालीवाल का हमला, हुड्डा के खिलाफ कार्रवाई की मांग
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अमृतसर। अजनाला से आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता कुलदीप सिंह धालीवाल ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा के कथित बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से मांग की है कि हुड्डा के खिलाफ पार्टी स्तर पर कड़ी कार्रवाई की जाए। धालीवाल ने कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े सज्जन कुमार को कथित तौर पर ‘रोल मॉडल’ बताने वाला कोई भी बयान सिख समुदाय की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला है।

अमृतसर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में धालीवाल ने 1984 के सिख विरोधी दंगों का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा हुई थी। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी के जख्म आज भी सिख समुदाय के मन में मौजूद हैं और इससे जुड़े किसी भी व्यक्ति को आदर्श के रूप में पेश किया जाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।

कांग्रेस नेतृत्व से कार्रवाई की मांग

धालीवाल ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि पार्टी का कोई वरिष्ठ नेता ऐसा बयान देता है, जिससे सिख समुदाय की भावनाएं आहत होती हैं, तो कांग्रेस को इस पर अपना स्पष्ट रुख सामने रखना चाहिए।

AAP नेता ने कहा कि राजनीतिक दलों के नेताओं को संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं पर बयान देते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उनके मुताबिक, 1984 की हिंसा केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों से जुड़ी ऐसी त्रासदी है जिसकी पीड़ा आज भी महसूस की जाती है।

उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि क्या वह कथित बयान से सहमत है। धालीवाल ने कहा कि यदि पार्टी इस तरह की टिप्पणी से सहमत नहीं है तो उसे संबंधित नेता के खिलाफ संगठनात्मक स्तर पर कार्रवाई करनी चाहिए।

1984 की हिंसा का किया उल्लेख

प्रेस कॉन्फ्रेंस में धालीवाल ने 1984 की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दिल्ली और देश के अन्य शहरों में सिखों के खिलाफ व्यापक हिंसा हुई थी। उन्होंने कहा कि इस हिंसा में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और अनेक परिवारों को अपने प्रियजनों से हाथ धोना पड़ा।

धालीवाल ने कहा कि पीड़ित परिवारों के लिए न्याय और सम्मान का सवाल आज भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक नेता की ओर से हिंसा से जुड़े व्यक्ति को आदर्श बताने की बात सामने आती है तो इससे समुदाय में स्वाभाविक रूप से रोष पैदा होता है।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर राजनीति करने के बजाय पीड़ितों की भावनाओं और न्याय की मांग को समझना चाहिए।

बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज

दीपेंद्र सिंह हुड्डा के कथित बयान को लेकर धालीवाल की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। AAP नेता ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले नेताओं के शब्दों का व्यापक प्रभाव पड़ता है। खासकर जब कोई बयान किसी समुदाय की भावनाओं से जुड़ा हो, तो उसकी जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

धालीवाल ने कहा कि कांग्रेस को यह बताना चाहिए कि वह 1984 की हिंसा को किस नजरिए से देखती है और इस घटना से जुड़े मामलों में पार्टी का वर्तमान रुख क्या है।

सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान जरूरी

AAP विधायक ने कहा कि पंजाब और सिख समुदाय के लिए 1984 की घटनाएं बेहद संवेदनशील विषय हैं। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों की भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी राजनीतिक चर्चा में उन घटनाओं की गंभीरता को कम करने वाली भाषा से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नेताओं को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के साथ सामाजिक और राजनीतिक जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है। उनके अनुसार, संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं को लेकर बयान देते समय नेताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके शब्द किसी समुदाय की पीड़ा को दोबारा न उभारें।

कांग्रेस से स्पष्टीकरण की मांग

धालीवाल ने कांग्रेस नेतृत्व से पूरे मामले पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि पार्टी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि हुड्डा का कथित बयान उनका निजी मत है या कांग्रेस की आधिकारिक सोच का प्रतिनिधित्व करता है।

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी वास्तव में 1984 की हिंसा के पीड़ितों के प्रति संवेदनशील है तो उसे ऐसे बयान से दूरी बनानी चाहिए और संबंधित नेता के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

धालीवाल ने कहा कि 1984 की घटनाओं को लेकर सिख समुदाय की भावनाएं आज भी बेहद गहरी हैं। इसलिए किसी भी नेता को ऐसा बयान देने से बचना चाहिए जो पीड़ितों के दर्द को नजरअंदाज करता हुआ दिखाई दे।

राजनीतिक बयानबाजी के बीच मुद्दा गरमाया

इस पूरे विवाद ने पंजाब की राजनीति में एक बार फिर 1984 की हिंसा से जुड़े मुद्दों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। AAP ने जहां धालीवाल के जरिए कांग्रेस नेतृत्व पर हमला बोला है, वहीं कांग्रेस की ओर से इस कथित बयान पर आगे क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक नजरें टिकी हैं।

धालीवाल ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि 1984 की हिंसा पंजाब और सिख समुदाय के लिए आज भी बेहद संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने कांग्रेस से मामले में स्पष्ट रुख अपनाने और पार्टी स्तर पर कार्रवाई करने की मांग दोहराई।

फिलहाल विवाद का केंद्र हुड्डा का कथित बयान और उसके संबंध में कांग्रेस नेतृत्व की संभावित प्रतिक्रिया है। धालीवाल का कहना है कि इस मुद्दे पर चुप्पी साधने के बजाय कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह 1984 की हिंसा से जुड़े व्यक्तियों और घटनाओं को किस नजरिए से देखती है।

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