
गुरुहरसहाय। बेहतर भविष्य और कारोबार का सपना लेकर करीब साढ़े तीन साल पहले मलेशिया गए गुरुहरसहाय के बस्ती कर्म सिंह वाली निवासी मिठन कुमार की अचानक मौत हो गई। विदेश से युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घर में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार अब मिठन कुमार के पार्थिव शरीर को भारत लाए जाने का इंतजार कर रहा है।
परिजनों के अनुसार मिठन कुमार करीब साढ़े तीन साल पहले रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर मलेशिया गया था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में मेहनत करके वह अपने कारोबार को आगे बढ़ाएगा और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करेगा। मलेशिया पहुंचने के बाद उसने अपना काम शुरू किया था और लगातार परिवार के संपर्क में रहता था।
परिवार की जिंदगी सामान्य तरीके से चल रही थी, लेकिन अचानक आए एक फोन ने सबकुछ बदल दिया। मिठन कुमार के दोस्त दीपक ने परिवार को फोन कर उसकी मौत की जानकारी दी। जैसे ही परिजनों ने यह खबर सुनी, घर में चीख-पुकार मच गई। किसी को विश्वास नहीं हो रहा था कि कुछ समय पहले तक परिवार से संपर्क में रहने वाला मिठन अब उनके बीच नहीं रहा।
परिजनों का कहना है कि मिठन कुमार की अचानक मौत ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है। विदेश में होने के कारण परिवार के सदस्य उसके अंतिम समय में उसके पास भी नहीं पहुंच सके। अब उनकी सबसे बड़ी चिंता उसके पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत वापस लाने की है, ताकि परिवार अपने रीति-रिवाजों के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर सके।
मिठन कुमार के निधन की जानकारी मिलने के बाद रिश्तेदार और आसपास के लोग परिवार को सांत्वना देने के लिए घर पहुंच रहे हैं। बस्ती कर्म सिंह वाली में भी घटना को लेकर शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मिठन बेहतर भविष्य बनाने के उद्देश्य से विदेश गया था और वहां मेहनत कर अपना कारोबार कर रहा था। उसकी अचानक मौत की खबर ने सभी को स्तब्ध कर दिया।
परिवार के मुताबिक मलेशिया जाने के पीछे मिठन का उद्देश्य केवल अपनी जिंदगी बेहतर बनाना नहीं था, बल्कि वह अपने परिवार के लिए भी मजबूत आर्थिक आधार तैयार करना चाहता था। विदेश में रहते हुए वह मेहनत से कारोबार कर रहा था और परिवार को उससे काफी उम्मीदें थीं। परिजनों ने उसके भविष्य को लेकर कई सपने देखे थे, लेकिन अचानक हुई मौत ने उन सभी सपनों को तोड़ दिया।
विदेश में किसी भारतीय नागरिक की मौत होने पर पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने के लिए कई औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। स्थानीय प्रशासन, संबंधित अस्पताल, भारतीय राजनयिक अधिकारियों और अन्य विभागों से जरूरी दस्तावेज पूरे होने के बाद ही शव को भारत भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। ऐसे में परिवार को उम्मीद है कि आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी होंगी।
फिलहाल मिठन कुमार की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसे लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। परिवार को उसके दोस्त के माध्यम से अचानक मौत की सूचना मिली है। मौत के वास्तविक कारण के बारे में आधिकारिक जानकारी और आवश्यक दस्तावेज मिलने के बाद स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
परिजनों के लिए सबसे कठिन बात यह है कि मिठन उनसे हजारों किलोमीटर दूर था। अचानक मौत की सूचना मिलने के कारण परिवार के सदस्य अंतिम समय में उससे मिल भी नहीं सके। अब परिवार चाहता है कि संबंधित अधिकारी और सरकार पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया में हर संभव मदद करें।
गुरुहरसहाय और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में युवा रोजगार और बेहतर आय की तलाश में विदेश जाते हैं। परिवार अपनी जमा पूंजी खर्च कर या अन्य आर्थिक व्यवस्थाएं करके युवाओं को विदेश भेजते हैं, ताकि वहां से बेहतर आमदनी हो सके। मिठन कुमार भी इसी उम्मीद के साथ मलेशिया गया था।
साढ़े तीन साल के दौरान उसने मलेशिया में अपना कारोबार खड़ा करने की कोशिश की। परिवार को उम्मीद थी कि आने वाले वर्षों में उसका काम और बेहतर होगा। लेकिन उसकी अचानक मौत ने परिवार की उम्मीदों को गहरे सदमे में बदल दिया।
मिठन कुमार के घर पर लगातार लोगों का आना-जाना लगा हुआ है। रिश्तेदार और परिचित परिजनों को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहे हैं। परिवार के सदस्यों की आंखें अब भी इस उम्मीद में हैं कि जल्द से जल्द मिठन का पार्थिव शरीर उनके पास पहुंचे और वे अंतिम बार उसका चेहरा देख सकें।
विदेश में मौत होने के कारण शव को भारत लाने में समय लग सकता है। आवश्यक दस्तावेजों में मृत्यु प्रमाणपत्र सहित स्थानीय अधिकारियों से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ सकती हैं। इसके बाद शव को विमान के जरिए भारत भेजने की व्यवस्था की जाती है।
परिवार की मांग है कि भारतीय अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की ओर से प्रक्रिया में सहयोग किया जाए। उनका कहना है कि वे पहले ही बेटे की अचानक मौत से गहरे सदमे में हैं और ऐसे समय में पार्थिव शरीर को वापस लाने की जटिल प्रक्रिया उनके लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन सकती है।
घटना के बाद गांव और आसपास के क्षेत्र में भी विदेश में रहने वाले युवाओं के परिवारों के बीच चिंता देखी जा रही है। विदेश में रहने वाले परिवार के सदस्य की अचानक मौत की खबर किसी भी परिवार के लिए बेहद कठिन होती है, क्योंकि दूरी के कारण तत्काल वहां पहुंचना संभव नहीं होता।
मिठन कुमार की मौत के कारणों के बारे में अभी स्पष्ट जानकारी का इंतजार है। परिजन भी मलेशिया में मौजूद उसके दोस्तों और संबंधित लोगों से संपर्क कर घटनाक्रम की जानकारी जुटा रहे हैं। परिवार जानना चाहता है कि उसकी तबीयत अचानक बिगड़ी थी या मौत के पीछे कोई अन्य कारण था।
इस बीच परिजनों की प्राथमिकता मिठन कुमार के पार्थिव शरीर को गुरुहरसहाय लाना है। परिवार चाहता है कि सभी औपचारिक प्रक्रियाएं जल्द पूरी हों और शव भारत पहुंच सके।
करीब साढ़े तीन साल पहले बेहतर भविष्य का सपना लेकर मलेशिया रवाना हुए मिठन कुमार की जिंदगी का सफर अचानक खत्म हो गया। जिस बेटे के सफल होकर घर लौटने का परिवार इंतजार कर रहा था, अब उसी के पार्थिव शरीर के आने का इंतजार करना पड़ रहा है। इस दुखद घटना ने परिवार के साथ पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है।





