पंजाब

Sukhna झील में डी-सिल्टिंग अभियान तेज, 34 हजार घनमीटर मिट्टी हटाई गई

Kavita2
29 Jun 2026 10:19 AM IST
Sukhna झील में डी-सिल्टिंग अभियान तेज, 34 हजार घनमीटर मिट्टी हटाई गई
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Punjab पंजाब: चंडीगढ़ स्थित सुखना झील की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और उसके पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने के उद्देश्य से यूटी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा चलाया जा रहा डी-सिल्टिंग (गाद हटाने) अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस अभियान के तहत अब तक करीब 34 हजार घनमीटर मिट्टी की खुदाई का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है। हालांकि अधिकारियों के अनुसार मानसून शुरू होने तक यह कार्य जारी रहेगा।

यूटी इंजीनियरिंग विभाग के अनुसार, यह कार्य झील के रेगुलेटरी एंड क्षेत्र में किया जा रहा है, जहां लंबे समय से गाद जमा होने के कारण जल भंडारण क्षमता प्रभावित हो रही थी। डी-सिल्टिंग के माध्यम से न केवल जल संग्रहण क्षमता को बढ़ाया जा रहा है, बल्कि झील के प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरणीय स्थिति को भी बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने जानकारी देते हुए बताया कि इस परियोजना का लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। उन्होंने कहा कि योजना के तहत झील के उन हिस्सों की पहचान की गई थी जहां सबसे अधिक गाद जमा हो गई थी, और वहां प्राथमिकता के आधार पर खुदाई कार्य शुरू किया गया।

अधिकारियों के अनुसार, डी-सिल्टिंग कार्य शुरू करने से पहले विशेषज्ञ संस्थानों से तकनीकी सलाह ली गई थी। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) रुड़की, वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) और वन विभाग की सिफारिशों के आधार पर एक माह पहले झील के सूखे हिस्से में गाद हटाने का कार्य प्रारंभ किया गया।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सुखना झील की प्राकृतिक जल धारण क्षमता को पुनः मजबूत करना है, ताकि बारिश के मौसम में अधिक पानी संग्रहित किया जा सके और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति से बचाव हो सके। इसके साथ ही झील के पारिस्थितिक तंत्र को संतुलित बनाए रखने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि गाद जमा होने के कारण झील की गहराई में कमी आई थी, जिससे जल संग्रहण क्षमता प्रभावित हो रही थी। डी-सिल्टिंग के बाद झील की क्षमता में सुधार की उम्मीद है और यह पर्यावरणीय दृष्टि से भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

परियोजना के दौरान यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि झील के आसपास के वन्य जीवन और प्राकृतिक आवास को कोई नुकसान न पहुंचे। विशेषज्ञों की निगरानी में यह कार्य किया जा रहा है ताकि पारिस्थितिक संतुलन बना रहे।

मुख्य अभियंता सीबी ओझा ने कहा कि मानसून से पहले अधिकतम कार्य पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि बारिश के दौरान झील अपनी पूरी क्षमता के साथ जल संग्रह कर सके। उन्होंने बताया कि परियोजना के शेष कार्य को भी तय समयसीमा में पूरा करने की योजना है।

स्थानीय प्रशासन का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान होगा। सुखना झील चंडीगढ़ की एक प्रमुख पहचान है और इसे संरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, समय-समय पर गाद हटाने जैसे कार्य झीलों और जलाशयों के लिए बेहद आवश्यक होते हैं, क्योंकि इससे उनकी जल धारण क्षमता बनी रहती है और पारिस्थितिकी तंत्र भी स्वस्थ रहता है।

फिलहाल डी-सिल्टिंग अभियान तेजी से जारी है और अधिकारियों का कहना है कि शेष कार्य मानसून से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि आगामी वर्षा के मौसम में सुखना झील अधिक प्रभावी ढंग से जल संग्रह कर सके और अपने पर्यावरणीय महत्व को बनाए रख सके।

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