
चंडीगढ़। साइबर अपराधियों ने शहर में ठगी का नया तरीका अपनाते हुए फर्जी गैस अकाउंट अपडेट और ई-चालान भुगतान लिंक के जरिए तीन लोगों को अपना शिकार बनाया। इन घटनाओं में पीड़ितों से करीब 6 लाख रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने के बाद साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तीनों मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठग लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को जाल में फंसा रहे हैं। कभी बैंक अधिकारी बनकर तो कभी सरकारी विभाग या निजी कंपनियों के प्रतिनिधि बनकर लोगों से निजी जानकारी और पैसे हासिल कर लेते हैं। इस बार ठगों ने गैस कनेक्शन अपडेट और ऑनलाइन चालान भुगतान के नाम पर लोगों को निशाना बनाया।
साइबर क्राइम थाना पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल पर भरोसा न करें। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, एपीके (APK) फाइल डाउनलोड करने और अपनी बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचें। पुलिस का कहना है कि थोड़ी सी लापरवाही लोगों को बड़ी आर्थिक नुकसान की ओर ले जा सकती है।
पहला मामला सेक्टर-44बी निवासी 69 वर्षीय डॉ. प्रदीप कुमार भारद्वाज से जुड़ा है। उन्होंने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उन्हें एक व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को अडानी गैस कंपनी का प्रतिनिधि बताया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने कहा कि गैस अकाउंट को अपडेट करना जरूरी है।
आरोपी ने डॉ. भारद्वाज से कहा कि अकाउंट वेरिफिकेशन के लिए उन्हें केवल 13 रुपये की फीस जमा करनी होगी। कम राशि होने के कारण पीड़ित को शक नहीं हुआ और उन्होंने आरोपी के बताए तरीके से भुगतान प्रक्रिया शुरू कर दी।
आरोप है कि इसी दौरान साइबर ठगों ने उनके मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी का गलत इस्तेमाल किया। इसके बाद उनके खाते से बड़ी रकम निकाल ली गई। जब पीड़ित को खाते से पैसे निकलने की जानकारी मिली तो उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया।
इसके अलावा शहर में दो अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की साइबर ठगी की घटनाएं सामने आई हैं। इनमें ठगों ने ई-चालान भुगतान के नाम पर फर्जी लिंक भेजे और लोगों को भुगतान करने के लिए कहा। लिंक पर क्लिक करने के बाद पीड़ितों के साथ धोखाधड़ी की गई।
पुलिस के मुताबिक, साइबर अपराधी अब लोगों को भरोसा दिलाने के लिए असली कंपनियों और सरकारी सेवाओं का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। वे बातचीत के दौरान ऐसी जानकारी देते हैं जिससे सामने वाले व्यक्ति को लगता है कि कॉल वास्तव में किसी अधिकृत संस्था की ओर से किया गया है।
जांच एजेंसियां अब ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी जुटा रही हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन वारदातों के पीछे कौन सा गिरोह सक्रिय है और कितने लोगों को इस तरह से निशाना बनाया गया है।
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, ऑनलाइन ठगी के मामलों में सबसे ज्यादा खतरा फर्जी लिंक और मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए होता है। अपराधी एपीके फाइल भेजकर लोगों के फोन में संदिग्ध एप इंस्टॉल करवा लेते हैं, जिसके जरिए वे निजी जानकारी तक पहुंच बना सकते हैं।
पुलिस ने नागरिकों को सलाह दी है कि किसी भी कंपनी या विभाग के नाम से आए संदेश या कॉल की पुष्टि आधिकारिक माध्यम से जरूर करें। यदि कोई व्यक्ति फोन पर बैंक जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य निजी विवरण मांगता है तो तुरंत सतर्क हो जाएं।
अधिकारियों ने कहा कि साइबर ठगी की घटना होने पर पीड़ितों को तुरंत साइबर हेल्पलाइन और पुलिस को सूचना देनी चाहिए, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके और पैसे वापस दिलाने की संभावना बढ़ सके।
फिलहाल साइबर क्राइम थाना पुलिस तीनों मामलों की जांच में जुटी है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों तक पहुंचने के लिए तकनीकी जांच और डिजिटल ट्रैकिंग की जा रही है। वहीं, आम लोगों से सतर्क रहने और ऑनलाइन लेन-देन में सावधानी बरतने की अपील की गई है।





