
x
अमृतसर में पशु क्रूरता
अमृतसर: पंजाब के अमृतसर में पशुओं के साथ कथित क्रूरता का परेशान करने वाला मामला सामने आया है। रामतीर्थ रोड इलाके के एक बंद मकान में तीन कुत्ते और एक बंदर बेहद खराब हालत में मिले। मामले की जानकारी मिलने के बाद पशु कल्याण से जुड़े लोगों ने मौके पर पहुंचकर चारों बेजुबान जानवरों को बाहर निकाला और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
रिपोर्ट के मुताबिक मामला रामतीर्थ रोड स्थित एक मकान का है। यहां जानवरों को कथित तौर पर लंबे समय से बंद रखा गया था। जब उनकी स्थिति के बारे में स्थानीय लोगों और पशु प्रेमियों को जानकारी मिली तो मामला सामने आया। बंद मकान के भीतर जानवरों की हालत देखकर लोगों ने चिंता जताई और उन्हें वहां से निकालने की कार्रवाई शुरू की।
बचाए गए जानवरों में तीन कुत्तों के अलावा एक बंदर भी शामिल है। चारों की हालत को देखते हुए उनकी देखभाल और उपचार की जरूरत बताई गई। पशु कल्याण से जुड़े लोगों ने उन्हें सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू किया। पूरे मामले ने एक बार फिर पालतू और अन्य जानवरों की देखभाल तथा उनके प्रति जिम्मेदारी का सवाल खड़ा कर दिया है।
जानवरों को घर में रखना अपने साथ बड़ी जिम्मेदारी भी लेकर आता है। उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी देने के साथ साफ जगह, उपचार और नियमित देखभाल उपलब्ध कराना जरूरी है। लंबे समय तक किसी जानवर को ऐसी जगह बंद रखना जहां उसके भोजन, पानी या स्वास्थ्य की उचित व्यवस्था न हो, उसकी जान के लिए भी खतरा बन सकता है।
घटना सामने आने के बाद पशु प्रेमियों ने इस पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि बेजुबान जानवर अपनी परेशानी किसी से बता नहीं सकते, इसलिए आसपास रहने वाले लोगों को भी ऐसी परिस्थितियों को लेकर सतर्क रहना चाहिए। यदि किसी मकान या परिसर में किसी पशु के साथ क्रूरता या उपेक्षा की आशंका दिखाई देती है तो संबंधित प्रशासनिक या पशु कल्याण अधिकारियों तक सूचना पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
अमृतसर में पहले से कई पशु कल्याण समूह बीमार और घायल जानवरों के बचाव तथा उपचार का काम कर रहे हैं। शहर की एक पशु संरक्षण संस्था के अनुसार वह 2019 से बीमार, घायल और लकवाग्रस्त पशुओं को चिकित्सा और आश्रय उपलब्ध करा रही है।
बंदर मिलने के कारण यह मामला और गंभीर हो जाता है, क्योंकि वन्यजीवों को पकड़ने, रखने या उनके प्रबंधन के मामले में अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित वन विभाग और अन्य सक्षम अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। यह जांच का विषय है कि बंदर उस मकान तक कैसे पहुंचा और उसे किन परिस्थितियों में वहां रखा गया था।
अब मामले में यह पता लगाया जाना जरूरी होगा कि मकान में जानवर कितने समय से थे, उनकी देखभाल कौन कर रहा था और उनकी खराब हालत के लिए कौन जिम्मेदार है। यदि जांच में जानबूझकर पशुओं की उपेक्षा या क्रूरता के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
पशुओं के साथ क्रूरता रोकने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि लोगों के बीच जागरूकता भी जरूरी है। पालतू पशु रखने वाले लोगों को यह समझना चाहिए कि जानवरों को केवल घर में रखना पर्याप्त नहीं है। उनकी नियमित देखभाल, पर्याप्त भोजन-पानी और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा उपलब्ध कराना भी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
फिलहाल तीन कुत्तों और एक बंदर को बंद मकान से बचाए जाने के बाद उनकी उचित देखभाल पर ध्यान दिया जा रहा है। अमृतसर की यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि बेजुबान जानवरों के प्रति क्रूरता या गंभीर लापरवाही की सूचना मिलने पर समय रहते कार्रवाई उनकी जान बचा सकती है।
Keywords
Next Story





