पंजाब

मोहाली विधायक की कंपनी जेएलपीएल पर उपभोक्ता आयोग का एक्शन

Kiran
16 Oct 2026 12:59 PM IST
मोहाली विधायक की कंपनी जेएलपीएल पर उपभोक्ता आयोग का एक्शन
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Mohali मोहाली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने मोहाली के विधायक कुलवंत सिंह की रियल एस्टेट फर्म, 'जनता लैंड प्रमोटर्स लिमिटेड' (JLPL मोहाली) को निर्देश दिया है कि वह सेक्टर 66 के निवासी कुलदीप सिंह को 42,13,678 रुपये की राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान करे। यह आदेश इसलिए दिया गया क्योंकि फर्म ने 10 मार्च 2023 को 'गैलेक्सी हाइट्स' (सेक्टर 66) में एक फ्लैट का कब्ज़ा बिना 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' (रहने की अनुमति) और 'कंप्लीशन सर्टिफिकेट' (निर्माण पूरा होने का प्रमाण पत्र) के सौंप दिया था।
JLPL को ब्रोशर में किए गए वादे के अनुसार बुनियादी सुविधाएं देने को कहा गया
अदालत ने फर्म को मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए 75,000 रुपये का मुआवजा देने के साथ-साथ कानूनी खर्च का भुगतान करने का भी निर्देश दिया। आयोग ने JLPL को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ता को ब्रोशर में किए गए वादे के अनुसार सभी बुनियादी सुविधाएं और सुविधाएं प्रदान करे (जिसमें कमियों को दूर करना भी शामिल है)। साथ ही, आयोग ने JLPL को आदेश दिया कि वह आदेश मिलने की तारीख से तीन महीने के भीतर संबंधित अधिकारियों से 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' और 'कंप्लीशन सर्टिफिकेट' प्राप्त करे।
शिकायतकर्ता का आरोप: एक पार्किंग स्पेस को दो में बदल दिया गया
शिकायतकर्ता कुलदीप सिंह ने बताया कि उन्होंने 1 अगस्त 2015 को 42,13,678 रुपये में 'गैलेक्सी हाइट्स' की छठी मंजिल पर एक फ्लैट बुक किया था, जिसका कब्ज़ा 30 जुलाई 2018 को मिलना तय था। लेकिन, उन्हें 5 दिसंबर 2022 को बिना 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' और 'कंप्लीशन सर्टिफिकेट' के फ्लैट का कब्ज़ा दे दिया गया। शिकायतकर्ता ने सेवाओं में कमी का आरोप लगाया और कहा कि "एक पार्किंग स्पेस को दो में बदल दिया गया है"।
कब्ज़ा मिलने की तारीख भी निकल गई, JLPL को ब्याज देने का निर्देश
5 अक्टूबर के अपने आदेश में, आयोग ने इसे JLPL की ओर से 'सेवाओं में कमी' (deficiency of services) माना और कहा कि "शिकायतकर्ता 'ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट' मिलने के बाद ही मेंटेनेंस चार्ज देने के लिए जिम्मेदार होंगे"। आदेश में कहा गया है, "ओपी (OPs) द्वारा ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट, कंप्लीशन सर्टिफिकेट और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यूनिट का वास्तविक कब्ज़ा न दे पाना, सेवा में कमी (deficiency in service) माना जाएगा। इसलिए, न्याय के हित में यह उचित होगा कि शिकायतकर्ता को, यूनिट के लिए जमा की गई 42,13,678 रुपये की राशि पर, कब्ज़ा देने की तय तारीख (30.07.2018) के बाद से 9 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज दिया जाए।"
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