पंजाब

पायलट के नेतृत्व में एक मंच पर आएंगे कांग्रेस नेता

Kavita2
14 Sept 2026 12:20 PM IST
पायलट के नेतृत्व में एक मंच पर आएंगे कांग्रेस नेता
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चंडीगढ़। पंजाब कांग्रेस के नवनियुक्त प्रभारी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सचिन पायलट मंगलवार 15 सितंबर को पहली बार पंजाब पहुंचेंगे। प्रभारी बनने के बाद उनका पहला दौरा संगठनात्मक बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। पायलट पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के चंडीगढ़ स्थित आवास की ओर विरोध मार्च का नेतृत्व करेंगे। यह प्रदर्शन संगरूर के गुलजार सिंह की मौत के मामले में न्याय की मांग को लेकर आयोजित किया जा रहा है।

कांग्रेस ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा को मंत्रिमंडल से हटाने और गुलजार सिंह की मौत से जुड़ी परिस्थितियों की स्वतंत्र निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। सचिन पायलट ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रदर्शन की घोषणा करते हुए कहा कि पंजाब कांग्रेस के नेता उनके साथ मार्च निकालेंगे और गुलजार सिंह के परिवार को न्याय दिलाने के लिए आवाज उठाएंगे।

इस प्रदर्शन को राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पंजाब कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी मतभेदों और अलग-अलग गुटों में बंटी दिखाई देती रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच विभिन्न मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। पायलट के पहले दौरे पर इन सभी प्रमुख नेताओं के एक मंच पर आने की संभावना है।

कांग्रेस नेतृत्व इस कार्यक्रम के जरिए राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार पर दबाव बनाने के साथ संगठन की एकजुटता का संदेश देना चाहता है। पार्टी के लिए यह प्रदर्शन एक प्रकार से शक्ति प्रदर्शन और आंतरिक एकता की परीक्षा भी होगा। यदि लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय दोनों प्रमुख खेमों के नेता एक साथ मार्च में शामिल होते हैं तो इसे आगामी विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जाएगा।

गुलजार सिंह संगरूर जिले के दिड़बा विधानसभा क्षेत्र के तूर बंजारा गांव के रहने वाले दिहाड़ी मजदूर थे। उन्होंने छह सितंबर को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से क्षेत्र में कथित रूप से आसानी से उपलब्ध हो रहे नशीले पदार्थ ‘चिट्टे’ को लेकर सवाल किया था। उन्होंने अपने बेटे की नशे की लत का जिक्र करते हुए दावा किया था कि परिवार को इसकी वजह से गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इसके अगले दिन गुलजार सिंह ने कथित रूप से जहरीला पदार्थ खा लिया था। उन्हें उपचार के लिए अलग-अलग अस्पतालों में ले जाया गया और बाद में लुधियाना के दयानंद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में उनकी मौत हो गई। परिवार और विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि वित्त मंत्री से सवाल करने के बाद गुलजार सिंह को दबाव और अपमान का सामना करना पड़ा था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।

पुलिस ने मामले में पांच लोगों के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। गिरफ्तार लोगों में गांव की सरपंच सहित अन्य स्थानीय व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। दर्ज प्राथमिकी में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का नाम शामिल नहीं है। कांग्रेस इसी बात को लेकर सरकार और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठा रही है।

कांग्रेस का दावा है कि गुलजार सिंह ने अपनी मौत से पहले बनाए गए एक वीडियो में कथित दबाव और पूरे घटनाक्रम का उल्लेख किया था। पार्टी ने उस वीडियो को भी जांच के दायरे में लाने की मांग की है। इसके साथ परिवार की सहमति और सम्मान के बिना अंतिम संस्कार कराए जाने का आरोप भी लगाया गया है। इन सभी आरोपों को लेकर कांग्रेस स्वतंत्र जांच चाहती है।

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि गुलजार सिंह के सवाल उठाने के बाद उन्होंने अधिकारियों को नशा बेचने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल बनाने परिवार को आर्थिक सहायता देने और एक सदस्य को नौकरी देने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद विपक्ष चीमा को पद से हटाने की मांग पर कायम है।

कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इस मामले को लेकर पंजाब सरकार पर हमला कर चुके हैं। उन्होंने चीमा को तत्काल पद से हटाने की मांग करते हुए आरोप लगाया था कि सरकार से सवाल करने वालों को दबाव का सामना करना पड़ रहा है। आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि विपक्ष घटना का इस्तेमाल सरकार को बदनाम करने के लिए कर रहा है।

सचिन पायलट को भूपेश बघेल के स्थान पर पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाया गया है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब प्रदेश संगठन में नेतृत्व और आगामी चुनाव की रणनीति को लेकर खींचतान सामने आती रही है। पार्टी हाईकमान को उम्मीद है कि पायलट सभी वरिष्ठ नेताओं के बीच समन्वय स्थापित कर संगठन को चुनावी मुकाबले के लिए तैयार करेंगे।

पायलट के दौरे के दौरान पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से उनकी बातचीत और आगामी चुनाव की रणनीति पर चर्चा होने की भी संभावना है। हालांकि उनके पहले दौरे का सबसे प्रमुख कार्यक्रम हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर मार्च ही रहेगा। कार्यक्रम में प्रदेश पदाधिकारियों विधायकों सांसदों पूर्व विधायकों और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं को शामिल करने की तैयारी की गई है।

पंद्रह सितंबर का प्रदर्शन यह तय करेगा कि पायलट अपने पहले दौरे में पंजाब कांग्रेस के अलग-अलग गुटों को कितनी मजबूती से एक मंच पर ला पाते हैं। कांग्रेस इसे गुलजार सिंह के परिवार के लिए न्याय की लड़ाई बता रही है लेकिन राजनीतिक रूप से यह कार्यक्रम आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ विपक्षी दबाव और कांग्रेस की संगठनात्मक एकता दोनों का बड़ा परीक्षण माना जा रहा है।

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