
भिखीविंड। त्योहारी सीजन के साथ विवाह-शादियों और अन्य समारोहों का दौर शुरू होते ही दूध, दही, पनीर और घी की मांग बढ़ गई है। मांग बढ़ने के बीच बाजार में अलग-अलग कीमतों पर बिक रहे पनीर ने उपभोक्ताओं के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर की अधिकांश दुकानों पर जहां पनीर 360 से 380 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है, वहीं कुछ दुकानदार इसे 300 रुपये किलो और थोक में 250 से 280 रुपये प्रति किलो तक बेच रहे हैं।
सामान्य बाजार भाव से करीब 80 से 130 रुपये प्रति किलो तक सस्ता पनीर मिलने के कारण इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम समय-समय पर खाद्य पदार्थों के नमूने लेती है, लेकिन इसके बावजूद मिलावटी पनीर के कारोबार को लेकर लोगों में चिंता बनी हुई है।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों के साथ पनीर और दूध से बने दूसरे खाद्य पदार्थों की खपत तेजी से बढ़ जाती है। विवाह समारोहों में भी पनीर से तैयार होने वाले व्यंजनों की मांग अधिक रहती है। इसी कारण बाजार में पनीर की बिक्री सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है।
कहीं 380 तो कहीं 250 रुपये किलो पनीर
शहर में पनीर की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। अधिकांश दुकानदार 360 से 380 रुपये प्रति किलो के हिसाब से पनीर बेच रहे हैं। दूसरी तरफ कुछ स्थानों पर यही पनीर 300 रुपये प्रति किलो में उपलब्ध कराया जा रहा है।
थोक में खरीदारी करने पर कीमत और कम होकर 250 से 280 रुपये प्रति किलो तक बताई जा रही है। ऐसे में उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक ही बाजार में पनीर की कीमत में इतना बड़ा अंतर कैसे हो सकता है।
खासकर विवाह समारोह, होटल, ढाबे और बड़े आयोजनों के लिए पनीर की थोक खरीद होती है। बड़ी मात्रा में खरीदारी के कारण थोक कीमत कम होना सामान्य बात हो सकती है, लेकिन खुदरा बाजार के मुकाबले 80 से 130 रुपये प्रति किलो तक का अंतर लोगों के बीच गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा कर रहा है।
त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग
त्योहारों और विवाह समारोहों के दौरान दूध और उससे बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ती है। पनीर कई तरह के व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए बड़े आयोजनों में इसकी खपत भी अधिक होती है।
इसी तरह दही, घी और दूध की मांग भी बढ़ जाती है। बाजार में अचानक मांग बढ़ने पर पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना कारोबारियों के लिए चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि बाजार में कीमत कम होने का फायदा जरूर मिलता है, लेकिन खाद्य सामग्री की गुणवत्ता से समझौता नहीं होना चाहिए। पनीर जैसी चीज सीधे खाने में इस्तेमाल होती है, इसलिए इसकी शुद्धता को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है।
सस्ते पनीर को लेकर उठ रहे सवाल
बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध पनीर को लेकर यह जरूरी नहीं कि हर सस्ता उत्पाद मिलावटी ही हो। थोक खरीद, उत्पादन लागत, आपूर्ति व्यवस्था और विक्रेता के मार्जिन जैसे कारणों से भी कीमत में अंतर हो सकता है। हालांकि कीमत में बड़ा अंतर होने के कारण उपभोक्ता इसकी गुणवत्ता की जांच की मांग कर रहे हैं।
लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा से जुड़े विभाग को अलग-अलग कीमतों पर बिक रहे पनीर के नियमित नमूने लेकर उनकी जांच करानी चाहिए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि बाजार में उपलब्ध उत्पाद तय गुणवत्ता मानकों पर खरे उतर रहे हैं या नहीं।
बिना प्रयोगशाला जांच के किसी पनीर को केवल उसकी कम कीमत के आधार पर मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता। ऐसे में विभागीय सैंपलिंग और जांच रिपोर्ट ही स्थिति स्पष्ट कर सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के बावजूद चिंता
क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए समय-समय पर नमूने लेती है। त्योहारी सीजन में खाद्य सामग्री की मांग बढ़ने के कारण ऐसी कार्रवाई और महत्वपूर्ण हो जाती है।
पनीर के साथ दूध, दही, घी और मिठाइयों की गुणवत्ता पर भी निगरानी रखने की जरूरत होती है। उपभोक्ताओं का कहना है कि सैंपल लेने के साथ उनकी जांच और नियमों का उल्लंघन मिलने पर कार्रवाई भी समय पर होनी चाहिए।
बाजार में यदि अलग-अलग स्थानों पर पनीर की कीमतों में बड़ा अंतर है तो इसकी वजह जानने के लिए संबंधित दुकानों और आपूर्तिकर्ताओं के उत्पादों की जांच की जा सकती है।
विवाह समारोहों में बढ़ जाती है खपत
विवाह-शादियों में शाही पनीर, मटर पनीर, पनीर टिक्का और अन्य व्यंजनों के कारण बड़ी मात्रा में पनीर की जरूरत पड़ती है। ऐसे में कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोग अक्सर थोक में इसकी खरीद करते हैं।
थोक बाजार में कम कीमत पर पनीर उपलब्ध होने के कारण आयोजकों की लागत कम हो सकती है, लेकिन गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है। बड़ी संख्या में लोगों को भोजन परोसे जाने वाले आयोजनों में खराब गुणवत्ता वाली खाद्य सामग्री परेशानी पैदा कर सकती है।
उपभोक्ताओं और कारोबारियों के बीच अब सबसे अधिक चर्चा इसी बात की है कि जब सामान्य बाजार में पनीर 360 से 380 रुपये प्रति किलो है तो कुछ स्थानों पर यही उत्पाद 250 से 300 रुपये प्रति किलो तक कैसे उपलब्ध हो रहा है।
त्योहारी सीजन में बढ़ी मांग के बीच सस्ते पनीर ने गुणवत्ता और शुद्धता को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं। ऐसे में नियमित सैंपलिंग और जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कम कीमत के पीछे केवल बाजार और थोक बिक्री का अंतर है या कहीं खाद्य गुणवत्ता के मानकों का उल्लंघन भी हो रहा है।





