पंजाब

Chandigarh बेअदबी गोलीबारी केस में अकाल तख्त की कार्यवाही पर सवाल

Kiran
13 Jun 2026 12:08 PM IST
Chandigarh बेअदबी गोलीबारी केस में अकाल तख्त की कार्यवाही पर सवाल
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Chandigarh चंडीगढ़ बेहबल कलां पुलिस फायरिंग मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) के सामने अकाल तख्त के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह के बयान पर एक और पूर्व जत्थेदार, ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

ज्ञानी हरप्रीत सिंह उन पांच सिख धर्मगुरुओं में से एक थे जिन्होंने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल को धार्मिक सज़ा सुनाई थी। उन्होंने कहा कि बयान दर्ज करना सही नहीं था, क्योंकि "ये कार्यवाही हमारे धार्मिक नियमों और सिद्धांतों का हिस्सा थी। ये अकाल तख्त पर हुई थी और इसे सबूत के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।"

हरप्रीत सिंह अकाली दल के अलग हुए गुट SAD (पुनर सुरजीत) के प्रमुख भी हैं। 2 दिसंबर, 2024 को सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने पंजाब के पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर सिंह बादल को अकाल तख्त की फ़सील (मंच) से 'तनख़ाह' (धार्मिक सज़ा) सुनाई थी।

SIT को दिए अपने बयान में ज्ञानी रघुबीर सिंह ने कथित तौर पर कहा कि बादल ने कार्यवाही के दौरान बेहबल कलां फायरिंग की ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी। गौरतलब है कि SAD नेताओं ने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गरगज से भी इस मामले पर गंभीरता से ध्यान देने और सिख मर्यादा के उल्लंघन पर उचित कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने ज्ञानी रघुबीर सिंह की निंदा की है क्योंकि उन्होंने सिखों की सर्वोच्च धार्मिक संस्था की कार्यवाही का इस्तेमाल अदालती मामलों में करके तख्त के हुक्मनामे का उल्लंघन किया है।

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