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Chandigarh चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी (आप) ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर जाति की राजनीति करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि बीजेपी जनता से जुड़ी वास्तविक विचारधारा से ध्यान भटकाने के लिए जातिगत समीकरणों को राजनीतिक बहस का केंद्र बनाने की कोशिश कर रही है। आप ने कहा कि राजनीति का आधार जाति नहीं, बल्कि विकास, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आम लोगों से जुड़ा मुद्दा होना चाहिए। आप नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा विचारधारा की राजनीति में जातिगत पहचान और सामाजिक विभाजन का इस्तेमाल कर अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी का कहना है कि समाज के अलग-अलग समूहों के बीच दूरियां बढ़ाने की बजाय राजनीतिक समुदायों को सभी समुदायों के साथ लेकर चलना जरूरी है।
आप ने कहा कि पंजाब और चंडीगढ़ जैसे इलाकों में लोगों की प्रतिबद्धताएं जुड़ी हुई हैं। बेरोजगारी, रोजगार, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य संस्थान, शहरों में थोक व्यापारी का विकास और युवाओं के लिए अवसर जैसे मुद्दे आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं। पार्टी ने बीजेपी से सवाल किया कि इन पार्टियों पर चर्चा करने के बजाय जातिवाद की राजनीति को आगे क्यों बढ़ाया जा रहा है. पार्टी का एक ही कहना है कि लोकतंत्र में हर नागरिक को अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। जाति के आधार पर राजनीतिक ध्रुवीकरण से समाज में असाध्य तनाव पैदा हो सकता है। आप ने दावा किया कि वह काम और उद्यम के बजाय ऐसी राजनीति की वकालत करने की कोशिश कर रही हैं।
जातीय राजनीति को लेकर विस्तृत राजनीतिक बहस
जातिगत भारतीय राजनीति में लंबे समय से एक महत्वपूर्ण सामाजिक और राजनीतिक कारक बनी हुई है। चुनाव के दौरान राजनीतिक दल बार-बार अलग-अलग सामाजिक राजनीति के समर्थन पर ध्यान देते हुए अपनी-अपनी रणनीति तैयार करते हैं। ऐसे में जाति आधारित राजनीति को लेकर राजनीतिक विचारधारा के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी देखने को मिलते हैं। आप का ताज़ा हमला इसी व्यापक राजनीतिक बहस का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी ने बीजेपी पर बढ़त बनाते हुए कहा कि जनता अब केवल राजनीतिक नारियों या जातिगत समीकरणों के आधार पर निर्णय नहीं लेना चाहती है। आप के कहे अनुसार बागानों से उनके काम, उद्यम और व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों का हिसाब-किताब मांग रहे हैं। दूसरी ओर, बीजेपी की ओर से इस तरह के आरोपों पर दिया गया जवाब राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होगा। भाजपा आम तौर पर ऐसे समर्थकों को राजनीतिक बयानबाजी के रूप में खारिज करती रहती है और अपने सिद्धांतों में विकास और सुशासन को प्रमुख आधार बताती है। इसलिए आप के अनुयायियों के बीच दोनों विचारधाराओं के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
चंडीगढ़ में मुद्दा का महत्व
चंडीगढ़ एक केंद्र शासित प्रदेश के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा की भी साझा राजधानी है। यहां स्थानीय प्रशासन, विकास, रोजगार, शिक्षा, सार्वजनिक प्रश्न, पुस्तकालय और छात्रावास से जुड़े मुद्दे राजनीतिक रूप से अहम हैं। ऐसे में जातिगत राजनीति को लेकर होने वाली बहस का असर स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है। आप का जोर इस बात पर है कि शहर और आसपास के क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को लेकर राजनीतिक बहस केंद्र में रखी जाए। पार्टी का कहना है कि जनता को यह तय करने का अधिकार है कि किसके लिए सबसे महत्वपूर्ण मुद्दे हैं और राजनीतिक आश्रमों को उसी के आधार पर अपनी रिकॉर्डिंग बनानी चाहिए।
आप ने सहयोगी भाजपा पर अमल किया
आप नेताओं ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीति में जातिवाद की पहचान के आधार पर समाज को खत्म किया जा सकता है। पार्टी ने कहा कि देश और समाज की प्रगति के लिए सभी कलाकारों की भागीदारी जरूरी है। किसी एक समुदाय या जाति को राजनीतिक रूप से केंद्र में व्यापक उत्खनन की अनदेखी नहीं करनी चाहिए। पार्टी ने यह भी कहा कि युवाओं को रोजगार मिले, छात्रों को बेहतर शिक्षा मिले, परिवार को पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिले, सामान्य नागरिकों को बेहतर संभावनाएं मिलें, शैक्षणिक योग्यताएं सुनिश्चित की जा सकें। AAP का दावा है कि वह अपने राजनीतिक अभियान में गुटबाजी को प्रमुखता से शामिल कर रही है।
प्रोटोटाइप तकरार में आगे की बढ़ोतरी संभव है
आप के इस बयान के बाद भाजपा और अन्य राजनीतिक विचारधाराओं की प्रतिक्रिया पर नजर बनी रहेगी। जाति, सामाजिक प्रतिनिधित्व और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे आने वाले समय में भी बहस का हिस्सा बन सकते हैं। विशेष रूप से इस्लामिक संप्रदाय में इन संप्रदायों के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना बनी हुई है। आप ने भाजपा पर जातिगत राजनीति का आरोप लगाते हुए राजनीतिक बहस को नया नुकसान दिया है। पार्टी की कोशिश है कि जातिगत अनुपातों पर चर्चा को लेकर विचारधारा विकास और पार्टियों की ओर रुख किया जाए। वहीं, बीजेपी का जवाब यह तय है कि आने वाले दिनों में यह बड़ा राजनीतिक विवाद बना है। कुल मिलाकर, चंडीगढ़ में जाति की राजनीति को लेकर आप और बीजेपी के बीच बढ़ रहे आरोप-प्रत्यारोप इस बात का संकेत है कि सामाजिक स्तर और विकास के मुद्दे पर आने वाले राजनीतिक विचार-विमर्श में एक साथ मौजूद हैं। अब देखिएगा कि जनता और अन्य राजनीतिक दल इस बहस को किस तरह से लेते हैं और क्या यह व्यापक निजीकरण रणनीति का हिस्सा बनता है।
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