
चंडीगढ़। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा के बाद चंडीगढ़ में छात्र संगठनों ने इसे अपने आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए जश्न मनाया। पंजाब यूनिवर्सिटी समेत शहर के कई हिस्सों में छात्रों ने विजय मार्च निकाला और एक-दूसरे को बधाई देते हुए संघर्ष की सफलता का दावा किया। हालांकि छात्रों ने साफ किया कि उनका आंदोलन केवल एक व्यक्ति के इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े व्यापक मुद्दों को लेकर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र-युवा आंदोलन के समर्थन में चंडीगढ़ में भी पिछले कई दिनों से प्रदर्शन किए जा रहे थे। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की घोषणा के बाद विभिन्न छात्र संगठनों ने इसे आंदोलन के दबाव का परिणाम बताया। पंजाब यूनिवर्सिटी के छात्र संगठनों पीएसयू (ललकार), आईसा, एसएफएस, दिशा और राजनीति विज्ञान विभाग के विद्यार्थियों ने सेक्टर-17 प्लाजा और पंजाब यूनिवर्सिटी परिसर में विक्ट्री मार्च निकालकर अपनी खुशी जाहिर की।
छात्र नेताओं सारा, जोबनप्रीत, संदीप, अजय, अरमान, अमीन और शुभम ने कहा कि देशभर में छात्रों और युवाओं की आवाज लगातार उठ रही थी। उन्होंने दावा किया कि जंतर-मंतर से लेकर अलग-अलग राज्यों में हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकार पर दबाव बनाया, जिसके बाद शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। छात्रों ने इसे संगठित जनसंघर्ष की ताकत बताते हुए कहा कि जब युवा एकजुट होकर अपनी मांगों को लेकर आगे आते हैं तो बड़े फैसलों पर भी असर पड़ता है।
विजय मार्च के दौरान छात्रों ने सेक्टर-17 प्लाजा में नारेबाजी की और आंदोलन की सफलता का जश्न मनाया। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट सेंटर से पूरे परिसर में मार्च निकाला गया। इस दौरान बड़ी संख्या में विद्यार्थी शामिल हुए। छात्रों ने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र संगठनों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगें अभी पूरी नहीं हुई हैं। उन्होंने शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाने, कोचिंग उद्योग पर नियंत्रण करने और निजी स्कूलों, कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों को बेहतर सरकारी निगरानी में लाने की मांग दोहराई। इसके अलावा सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने और अलग-अलग प्रवेश परीक्षाओं की जगह योग्यता आधारित भर्ती व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई गई।
छात्र नेताओं ने रोजगार के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि देश में बड़ी संख्या में युवा डिग्री हासिल करने के बाद भी रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से प्रत्येक योग्य युवा को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की। साथ ही कहा कि यदि रोजगार उपलब्ध कराना संभव नहीं है तो युवाओं को सम्मानजनक बेरोजगारी भत्ता दिया जाना चाहिए।
छात्र संगठनों ने कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दे केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे समाज और देश के भविष्य से जुड़े हैं। इसलिए वे इस अभियान को और व्यापक बनाएंगे तथा अधिक से अधिक छात्रों और युवाओं को इससे जोड़ने का प्रयास करेंगे।
चंडीगढ़ में हुए इस प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने एक ओर जहां शिक्षा मंत्री के इस्तीफे को अपनी जीत बताया, वहीं दूसरी ओर स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य केवल राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था और रोजगार नीति में व्यापक सुधार लाना है। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।





